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तुम भीतर तक भर जाओगे बाबाजी

मेहनत से यदि डर जाओगे बाबाजी
जीवन में क्या कर पाओगे बाबाजी

रोते रोते आये  जैसे दुनिया में
वैसे ही तुम घर जाओगे बाबाजी

बाइक पर मोबाइल से मत बात करो
गिर जाओगे, मर जाओगे बाबाजी

पल दो पल भी अगर प्रभु को याद किया
भवसागर से तर जाओगे बाबाजी

कारें कितनी भी हों, काम न आएँगी
आखिर कान्धों पर जाओगे बाबाजी

प्यार किसी प्राणी से कर के तो देखो
तुम भीतर तक भर जाओगे बाबाजी

बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी

'अलबेला' चुपचाप निकल लो महफ़िल से
वरना दिन भर सर खाओगे बाबाजी 

-अलबेला खत्री

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Comment by वीनस केसरी on July 22, 2012 at 9:24pm

बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी

वाह वाह वा
क्या कहने बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है

Comment by Albela Khatri on July 22, 2012 at 8:17pm

धन्यवाद  दीप्ति  जी

Comment by Albela Khatri on July 22, 2012 at 8:12pm

आदरणीय उमाशंकर जी............
आपका प्यार  पा कर  मज़ा आ जाता है
___सादर

Comment by deepti sharma on July 22, 2012 at 8:06pm

बिलकुल सही कहा आपने 

मेहनत से यदि डर जाओगे बाबाजी
जीवन में क्या कर पाओगे बाबाजी

सुंदर रचना  

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 22, 2012 at 4:36pm

आपका स्वागत है ...

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 22, 2012 at 4:32pm

जो समझे हैं सार गजब इन ग़ज़लों का

वो तो सागर पार हो गया बाबा जी

छोटी छोटी गूढ़ बात है बाबा जी

दिल में करती गहरा घात है बाबा जी

जय हो ....अलबेला जी की

Comment by Albela Khatri on July 22, 2012 at 3:33pm

धन्यवाद
बहुत बहुत धन्यवाद अम्बर जी...........
आपने सराह दिया ...
अपना काम हो गया
__सादर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 22, 2012 at 2:53pm

//बाइक पर मोबाइल से मत बात करो
गिर जाओगे, मर जाओगे बाबाजी

कारें कितनी भी हों, काम न आएँगी
आखिर कान्धों पर जाओगे बाबाजी

बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी//

उपयोगी हर बात कही है अलबेला.

अपनाओ तो तर जाओगे बाबा जी :-)

वाह आदरणीय अलबेला जी वाह! इन अशआर के माध्यम से क्या सार्थक सन्देश दिए हैं आपने ......! बहुत-बहुत बधाई आदरणीय !

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