For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गज़ल - आदमी जो बेतुका है

वो अगर  मुझसे खफा है

हक है उसको क्या बुरा है

 

घोंसले  के साथ  जुडकर

एक  तिनका  जी  रहा है

 

जो अपरिचित  है नदी से

बाढ़   पर  वो  बोलता  है

 

है   यकीं   चारागरी   पर

हो  जहर  तो  भी  दवा है

 

देख  कर  मुँह  फेर लेना

कुछ  पुराना   आशना  है

 

टूट  ही  जाना  है  उसको

सच  दिखाता  आइना  है

 

जी  रहा   तुकबंदियों  को 

आदमी   जो   बेतुका   है

 

 

..................... अरुन श्री !

Views: 893

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Arun Sri on July 20, 2012 at 11:08am

गणेश जी बागी सर , सम्मानित महसूस कर रहा हूँ आपकी टिप्पणी पढकर ! आपने गज़ल को पढ़ा ही नही , महसूस भी किया ! धन्यवाद !

Comment by Arun Sri on July 20, 2012 at 10:56am

वीनस केसरी सर , आपके Good ने तो Feel Good का एहसास करा दिया !धन्यवाद !
वैसे आपसे सुझावों की भी उम्मीद रहती है !
सादर !

Comment by Arun Sri on July 20, 2012 at 10:53am

आशीष यादव जी , पसंदगी के लिए शुक्रिया आपका !

Comment by Arun Sri on July 20, 2012 at 10:50am

सीमा अग्रवाल मैम , धन्यवाद आपकी सराहना के लिए और शुभकामनाओं के लिए भी !

Comment by Raj Kumar Rohilla on July 20, 2012 at 9:25am

बहुत सुन्दर लिखा है भाई.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 20, 2012 at 9:22am

वाह वाह शानदार अरुण भैया छा गए
क्या शानदार शेर कहे हैं

घोंसले  के साथ  जुडकर

एक  तिनका  जी  रहा है

जो अपरिचित  है नदी से

बाढ़   पर  वो  बोलता  है


दाद पे दाद क़ुबूल कीजिये


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 20, 2012 at 8:56am

//घोंसले  के साथ  जुडकर

एक  तिनका  जी  रहा है//

अरुण जी, क्या कहूँ , ऐसे अशआर रोज़ रोज़ नहीं निकलते, इस ग़ज़ल की जितनी भी तारीफ़ की जाय कम है, आपकी इस कृति को सलाम | मुबारकवाद कुबूल करें |

Comment by वीनस केसरी on July 20, 2012 at 1:52am

जी  रहा   तुकबंदियों  को 

आदमी   जो   बेतुका   है

 
good

Comment by आशीष यादव on July 20, 2012 at 12:26am

कमाल के शे'र कहे हैं। एक उम्दा गजल है। बदाई स्वीकारें

Comment by Arun Sri on July 19, 2012 at 8:04pm

सौरभ पाण्डेय सर , आपकी उपस्थिति ने मन प्रसन्न कर दिया ! आज कल थोडा व्यस्त हूँ क्योकि टैक्स ऑडिट का समय आ रहा है ! इसीलिए निरंतरता नही बन पा रही है ! लिखना भी कम हो गया है इस समय ! हालाँकि भाव कागज पर उतारता रहता हूँ लेकिन बिखरे हुए  टुकड़ों को जोड़कर कविता नही बना पा रहा  हूँ !
गज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया किसी सम्मान से कम नही ! सादर धन्यवाद !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
8 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
21 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Tuesday
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service