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मेरा यार मुझसे जुदा हुआ,                                               

मेरी जान जैसे निकल गई.

मुझे प्यार उसका न मिल सका,

मेरी आह मुझमे ही मिल गई.

उसे चाहना या न चाहना

उसे पूजना या न पूजना 

मेरी चाहतों का हिसाब क्या,

मेरी रूह भी हो विकल गई..

मुझे प्यार उसका न मिल सका,

मेरी आह मुझमे ही मिल गई..

कोई और तेरा न नाम ले 

तुझे रख सकूँ निगाह में

तेरी बात भी जो हुई कहीं,

जुबाँ यार मेरी फिसल गई..

मुझे प्यार उसका न मिल सका,

मेरी आह मुझमे ही मिल गई..

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Comment

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Comment by राज लाली बटाला on April 14, 2012 at 2:36am

अच्छी लगी !! शुभ कामनाये !! 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 14, 2012 at 2:34am

मृदुजी, आपसे इन विन्दुओं पर ही सही कुछ विशेष की अपेक्षा थी. तैयारियों के क्रम में बहुत कुछ लिख जाता है. खैर.. .

Comment by arunendra mishra on April 14, 2012 at 1:09am

मुझे प्यार उसका न मिल सका,

मेरी आह मुझमे ही मिल गई..

...प्रेम की अंत्यंत ही सराहनीय अभिव्यक्ति .....

कृपया ध्यान दे...

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