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सोचा था
तेरी याद के सहारे
जिंदगी बीता लूंगा
अब न तेरी याद आती है
न ही जिंदगी के दिन ही बचे
जो बचे भी उनमें क्या तेरे मेरे
क्या सुबह, क्या शाम
बस एक ही तमन्ना है
जहां भी रहो मुझे याद करना
क्योंकि तुम याद करोगे तो
दुनिया से जाते वक्त गम न होगा
क्योंकि तुम, तुम हो और हम, हम
राहें जुदा हो गई तो क्या
कभी मिलकर चले थे मंजिल की ओर
अब तो सोच कर भी सोचता हूं
क्यों मिले थे हम और क्यों बिछड़े
सोचता हूं
तेरी याद को ही भुला दूं
पर कमबख्त याद है ही ऐसी
भुलाते भुलाते भी रूला ही देती है तेरी याद.

Views: 414

Comment

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Comment by Abhinav Arun on March 12, 2012 at 2:48pm

एक सच्चाई है आपकी रचना | यादें हमारा साथ कहाँ छोडती हैं और उनपर हमारा वश कहाँ !!! बधाई इस सशक्त अभिव्यक्ति हेतु !!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 12, 2012 at 12:59pm

सच है यादें भुलाई नहीं जा सकतीं| बहुत सुन्दर|

Comment by Brij bhushan choubey on March 12, 2012 at 11:57am

सोचा था
तेरी याद के सहारे
जिंदगी बीता लूंगा
अब न तेरी याद आती है
न ही जिंदगी के दिन ही बचे |....वाह वाह वाह सीधे दिल की बात दिल में उतर गई बहुत खूबसूरत पंक्तिय कवी जी  |

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on March 12, 2012 at 11:37am

वाह,,,,,ज़नाब क्या बात है,,,,,,,,बहुत खूब,,,,,,,,,,,बधाई

Comment by AVINASH S BAGDE on March 12, 2012 at 10:15am

पर कमबख्त याद है ही ऐसी
भुलाते भुलाते भी रूला ही देती है तेरी याद.BEAUTYFUL...


Comment by AVINASH S BAGDE on March 12, 2012 at 10:14am

अब न तेरी याद आती है

न ही जिंदगी के दिन ही बचे

जो बचे भी उनमें क्या तेरे मेरे

क्या सुबह, क्या शाम....KYA BAT HAI.....HARISH BHATTA..

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