For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हर दिल अज़ीज़....

हर दिल अज़ीज़....

रिश्तों को निभा लेने की जिसमे तमीज है,
यकीन मानिये   वो ,   हर-दिल- अज़ीज़ है.
#
ठहरा रहे जमीं को, क्योंकर कुसूरवार,
पौधे  वही  उगेंगे,  बोये  जो  बीज है!
#
उनको दवा न दीजिये,आँखों क़े मर्ज़ की,
नज़रें   चुरा  रहें  वो, दिल क़े मरीज़ हैं.
#
पत्थर सा सख्त चेहरा,रखते हैं जो यहाँ,
दो  घडी  में  पर  वो,  जाते  पसीज  हैं.
#
सिरहाने का  तकिया ,  उसको  बनाइये,
मुश्किलों से हाँथ में , आई  जो  चीज़ है.
#
अविनाश बागडे....

Views: 583

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 5:31pm

आपका ह्रदय से आभार.नीरज भाई...आपने तो इस अंदाज में दाद दी है कि मै निरुत्तर हूँ.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 5:26pm

Seema agrawal  mam...bahut-bahut aabhar.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 12, 2012 at 10:19am

संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' जी....बहुत-बहुत धन्यवाद...

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 11, 2012 at 7:43pm

आदरणीय अविनाश जी,

उनको दवा न दीजिये,आँखों क़े मर्ज़ की,
नज़रें   चुरा  रहें  वो, दिल क़े मरीज़ हैं.
वाह-वाह!! बहुत ख़ूब!! निःशब्द हो गया मैं तो|
Comment by AVINASH S BAGDE on March 11, 2012 at 4:10pm

भाई अभिनव जी, हरीश जी ..बहुत-बहुत धन्यवाद...
Comment by AVINASH S BAGDE on March 11, 2012 at 4:09pm

आदरणीय सौरभ जी और वीनस जी,

आपकी बातो से मै सौ फी सदी सहमत हूँ......कोशिशें सुधरने की जारी रहेगी....आभार.
Comment by Abhinav Arun on March 11, 2012 at 3:57pm
रिश्तों को निभा लेने की जिसमे तमीज है,
यकीन मानिये   वो ,   हर-दिल- अज़ीज़ है.
वाह वाह श्री अविनाश जी यकीन मानिये गांठ बाँध ली मैंने |एक एक शेर बोल रहा है !! बधाइयाँ !!
Comment by Harish Bhatt on March 11, 2012 at 12:39pm

Avinaash ji namastey.

sahi baat hai. 

ठहरा रहे जमीं को, क्योंकर कुसूरवार,

पौधे  वही  उगेंगे,  बोये  जो  बीज है!
Comment by वीनस केसरी on March 10, 2012 at 11:06pm

सुन्दर भाव है

आगे  जो कहना चाह रहा हूँ सौरभ जी पहले ही कह चुके हैं


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 10, 2012 at 11:03pm

भाई अविनाशजी, भाव बहुत ही अच्छे हैं. सादर बधाई स्वीकार करें. हाँ, ग़ज़ल के शिल्प के लिहाज से अभी बहुत कुछ करना है.

मैं कुछ कहूँ इससे पूर्व ही आप समझ सकते हैं कि मैं क्या कह रहा हूँ.

 

ठहरा रहे जमीं को, क्योंकर कुसूरवार,
पौधे  वही  उगेंगे,  बोये  जो  बीज है! ..   इतने खूबसूरत भावों से पगे इस शेर से शुतुर्गुर्बा का दोष तो दूर किया ही जा सकता है.
इस मंच की सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का वास्ता, हम-आप मिलजुल कर बहुत कुछ सीखते-समझते जायेंगे. 
सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service