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बहुत दुखते हैं

पुराने घाव ,

जब आती हैं

मरहम लगाने

नई उँगलियाँ !

उन्हें नही पता -

कितनी है

जख्म की गहराई ,

क्या होगी

स्पर्श की सीमा !

उनमे नही होती

पुराने हाथों जैसी छुअन !

 

रिसने दो

मेरे घावों को ,

क्योकि बहुत दुखतें हैं

पुराने घाव

जब आती है

मरहम लगाने

नई उँगलियाँ !

 

अब और दर्द सहा न जाएगा !

 

 

.................................... अरुन श्री !

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Comment

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Comment by Arun Sri on February 25, 2012 at 12:02pm

बागी सर , आपके आत्मीय शब्दों ने मन में जिस ऊर्जा का संचार किया वो अवर्णनीय है ! धन्यवाद ! दृष्टि बनाए रखें !


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 25, 2012 at 11:34am

अरुण सच में आपको पढ़ना हमेशा ही आनंदपूर्ण रहा है, घाव, मरहम और उंगलियाँ नई उंगलियाँ, इन बिम्बों को उठाकर आपने रचना को सोच की ऊँचाइयों पर ले गए है, बधाई स्वीकार करें |

Comment by Arun Sri on February 25, 2012 at 10:18am

आदरणीय सतीश सर , आपकी जैसे गुणी और वरिष्ट की सराहना अनायास ही आत्ममुग्धता का कारण बन जाती है ! मेरी रचना को अलंकृत करने के लिए सादर धन्यवाद ! नमन आपको !

Comment by satish mapatpuri on February 25, 2012 at 10:07am

मरहम लगाने

नई उँगलियाँ !

उन्हें नही पता -

कितनी है

जख्म की गहराई ,

क्या होगी

स्पर्श की सीमा !

उनमे नही होती

पुराने हाथों जैसी छुअन

वाह ........  गज़ब का सम्प्रेषण ....... खुबसूरत कहन .......... सुन्दर भाव ......... बधाई अरुण जी
Comment by Arun Sri on February 24, 2012 at 10:49am

आशुतोष सर , रचना आपके ह्रदय को छू सकी तो लिखना सफल रहा ! धन्यवाद !

Comment by Arun Sri on February 24, 2012 at 10:49am

आदरणीय सौरभ सर , आपकी सराहना पाना किसी भी रचना के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं ! मेरी इस रचना को अलंकृत करने के लिए सादर धन्यवाद !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 23, 2012 at 3:25pm

बहुत ही संवेदनापूरित रचना है, अरुणजी.  रचना के आयाम ने मुग्ध कर दिया.

शुभेच्छाएँ.

Comment by Arun Sri on February 23, 2012 at 1:18pm

आशा मैम , आपकी सराहना ने गौरवान्वित किया ! दृष्टि बनाए  रखे ! धन्यवाद !

Comment by asha pandey ojha on February 23, 2012 at 12:58pm

 aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh awesome poetry 

Comment by Arun Sri on February 23, 2012 at 12:14pm

नीरजा मैम , ये दर्द के लम्हे ही ती जीवन का एहसास कराते है , बताते है कि हम अभी जिन्दा हैं !

सुना है " काँटों को मुरझाने का खौफ नही होता !"

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