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कुछ हाइकु 

(१)
मंदिर द्वारे 
 जीवन अभिशाप 
 देव दासी का
 (२)
लाख पहरे 
 खोल कर खिड़की 
  उड़ा परिंदा 
(३)
निगल रहा 
 आदमी को आदमी 
 अजगर सा 
 (४)
हजारों जख्म 
  जिन्दगी की पीठ पे 
  रिश्ते खंज़र
(५)
प्रथम स्पर्श 
  स्निग्ध  मंद  हवा  सा 
   प्रियतम का 
(६)
आँखों की खुश्बू
   गंधीले कर देती 
    जीवन क्षण 
(७)
मन चेतना 
  जीवन बदलती 
   मूल चेतना 

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Comment

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Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 14, 2012 at 7:57am

निगल रहा...आदमी को आदमी...अजगर सा ...आदरणीय आशा जी वैसे तो हाइकू एक जापानी काव्य विधा है और अभिवयक्ति के हिसाब से २०/२० जैसा ही है किन्तु शेक्सपीयर के अनुसार संक्षिप्तता ही काव्य की आत्मा है ..और मुझे भी यह ठीक ही जान पड़ता है ....सतसैया के दोहरे ज्यों नाविक के तीर की तरह आपकी हृदयस्पर्शी हाइकू पर मैं क्या ..बस सुन्दर,सुन्दर,सुन्दर भाई|

Comment by Harish Bhatt on March 6, 2012 at 8:02am

आदरणीय आशा जी प्रणाम

बहुत ही शानदार.............   लाख पहरे,  खोल कर खिड़की ,  उड़ा परिंदा

हार्दिक बधाई


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 29, 2012 at 6:48am

आदरणीया आशाजी, आपके सद्-प्रयास से हाइकू विधा की सभी प्रविष्टियाँ उच्च श्रेणी की हैं.

सादर बधाइयाँ

Comment by Abhinav Arun on February 28, 2012 at 12:51pm

अति सुन्दर और प्रभावपूर्ण हाइकू आदरणीया आशा जी हार्दिक बधाई आपको !!

निगल रहा 
 आदमी को आदमी 
 अजगर सा 
 (४)
हजारों जख्म 
  जिन्दगी की पीठ पे 
  रिश्ते खंज़र
great aasha di congrats !!
Comment by UMASHANKER MISHRA on February 26, 2012 at 10:22pm

बहुत बढिया 

दार्शनिक है  हाइकु 

मंदिर द्वारे 

 जीवन अभिशाप 
 देव दासी का



मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 25, 2012 at 5:39pm

बहुत ही सुन्दर और शिल्प पर खरे हाइकु , बधाई आशा दी |

Comment by asha pandey ojha on February 24, 2012 at 3:18pm

aap sabhi ka hardik dhnywaad 

Comment by AVINASH S BAGDE on February 23, 2012 at 10:35am

३ निगल रहा 

 आदमी को आदमी 
 अजगर सा 
 ४ हजारों जख्म 
  जिन्दगी की पीठ पे 
  रिश्ते खंज़र.....आशा जी बहुत खूबसूरत हाइकू ......khs kar ye do.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 23, 2012 at 9:14am

laajabaab haiku Aasha ji.

Comment by Er. Ambarish Srivastava on February 22, 2012 at 8:14pm

//निगल रहा 

 आदमी को आदमी 
 अजगर सा//
आदरणीया आशा जी बहुत खूबसूरत हाइकू रचे  हैं  आपने !  बहुत बहुत बधाई आपको !

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