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"कुछ पन्ने पुराने"



पुरानी डायरी देख...
खुल गये कुछ पन्ने पुराने...
कुछ सपने... कुछ अरमाँ... कुछ यादें...
जिन्हें कभी जीया था मैनें, यूँ ही...
यँहीं इन पन्नों में...
जिनकी भीनी-भीनी महक...
आज भी गुमा रही थी मुझे...

वही ताज़गी... वही एहसास... वही मासूमियत...
पर कुछ है...
जो अब वैसा नही...
क्या है...???
शायद... ’मैं’...???

हाँ... ’मैं’...!!
नही रही अब ’मासूम’...
नही रहे अब वो ’एहसास’...
वो जज़्बात...
जो थे मेरी ’पनाहों’ में कभी...
वक्त गुज़रा... और गुज़र गये सारे एहसास...
दफ़ना दिये, जाने किस कोने में...
शायद अब निशानी भर हैं...
यें...
कुछ पन्ने पुराने...!!

::::जूली मुलानी::::
::::Julie Mulani::::

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Comment

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Comment by Julie on September 12, 2010 at 11:25pm
बहुत बहुत शुक्रिया आशीष जी...!! :-)
Comment by आशीष यादव on September 12, 2010 at 10:55pm
Bahut saarthak rachana hai. Sach me dairy ke panne un bite dino ki yaad dilate hai ki ham kaise jiye the kaun sa pal. Bahut uttam
Comment by Julie on September 12, 2010 at 10:27pm
शुक्रिया अरुण जी...!! :-)
Comment by Abhinav Arun on September 12, 2010 at 10:25pm
आहा ! अति सार्थक चित्र , और मुग्ध करती कविता की पंक्तियाँ .साधुवाद !!! शुभकामनाएं !!!
Comment by Julie on September 10, 2010 at 4:42pm
Shukariya Bijay jee...!! :-)
Comment by BIJAY PATHAK on September 10, 2010 at 1:31pm
Bahut khub
Comment by Julie on September 9, 2010 at 11:22pm
बागी जी आपका बहुत बहुत आभार...!!:-)

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 9, 2010 at 10:03pm
भले हो पन्ने पुराने,
हमे तो आज भी लगते नये,
लौट कर देखिये फिर पुराने दिनों को,
वही मासूमियत वही एहसास,
अल्हड़पन और जज्ज्बात ,
मिल जायेंगे यही कही आस पास,
करो एक प्रयास,करो एक प्रयास ,

अच्छी रचना, सुंदर विचार, हर बार मजेदार, धन्यवाद,

कृपया ध्यान दे...

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