For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथा - जीवन पथ

मैं जिस शहर में रहता हूं, वहां एक नेत्रहीन व्यक्ति है। वे पूरे शहर में खुद ही एक डंडे के सहारे कहीं भी चले जाते हैं। उन्हें इस तरह ‘जीवन पथ’ पर आगे बढ़ते बरसों हो गया। उनकी जिजीविषा देखकर हर कोई हतप्रद रह जाता है। यह तो हम सब कहते रहते हैं कि बेसहारे को सहारे की जरूरत होती है, मगर यह नेत्रहीन व्यक्ति ऐसी सोच रखने वालों के लिए मिसाल है। दरअसल, पिछले दिनों नेत्रहीन व्यक्ति शहर के चौक से गुजर रहा था, इसी दौरान उन्हें सड़क किनारे से आवाज आई कि कोई उसे सड़क पार करा दे। इससे पहले कोई उस असहाय व्यक्ति को पार लगाने आता, उससे पहले ही नेत्रहीन व्यक्ति ने स्वस्फूर्त पहल करते हुए उसे दूसरी छोर पहुंचाया। कथा का तात्पर्य यही है कि किसी को असहाय नहीं समझना चाहिए, मगर जो मदद की अपेक्षा रखते हैं, उन्हें सहायता देने हर समय तैयार रहना चाहिए। ऐसे में नेत्रहीन व्यक्ति का प्रयास निःसंदेह संस्मरणीय है। इससे निश्चित ही सीख मिलती है। यह भी समझ मंे आती है कि यही सबसे बड़ा ‘जीवन पथ’ है।

राजकुमार साहू
जांजगीर, छत्तीसगढ़
मोबा . - 074897-57134, 098934-94714, 099079-87088

Views: 349

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष यादव on December 6, 2011 at 2:54pm

post bahut achchha lga. sundar sandesh bhi hai isme. lekin ye laghukatha kaha hai?


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 6, 2011 at 12:20pm

यह पोस्ट मुझे लगता है कि लघु कथा तो नहीं ही है, यह आलेख की तरह लगता है जिसमे सन्देश दिया गया है | 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Monday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service