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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 13, 2012 at 9:49am

रंग बिरंगे सपनों की दुनिया थी हमारी 

गुजरते वक़्त के साथ ज़माने बदल गये 

इस रचना में अंतर्निहित छटपटाहट को महसूस किया जा सकता है. विशेषकर, उपरोक्त द्विपदी पर हार्दिक बधाइयाँ. 

 

Comment by Vasudha Nigam on January 13, 2012 at 9:39am

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद ... 

Comment by आशीष यादव on October 20, 2011 at 11:01pm

समय के साथ बहुत कुछ न चाहते हुए भी बदल जाता है|

अच्छी रचना पेश की है आपने | 
बधाई 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 20, 2011 at 6:37pm

वसुधा जी, घरेलू व् पारंपरिक महिलाओं को केन्द्रित कर कही गई बात इस रचना का आकर्षण है, वक्त बदला है, चाहरदिवारियां टूट रही है, विचार बदल रहे है | खुबसूरत अभिव्यक्ति हेतु आभार |

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