For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज मै आप लोगो की सेवा में एक बार फिर अपनी रचना प्रस्तुत रहा हूँ. मुझे उम्मीद है की ये आप लोगो को पसंद आएगी. और आप लोगो का आशीर्वाद रूपी कमेन्ट अवश्य मिलेगा.
जागरण गीत

पूरब में जगी है भोर, पंछी करने लगे है शोर,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,

जग जाएगा तो पायेगा जग में सुन्दर अमूल खजाना,
सोकर खोकर समय चूकि फिर रह जाए पीछे पछताना .
समय के रहते जाग, की अपना हिस्सा ले तू आज,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,

अपना सब कुछ दे देने को खड़े ये देखो पेड़ सयाने,
लेने की तो कोशिश कर तू पूरा मिलेगा सोलह आने.
लूट सके तो लूट, मिली है आज ये पूरी छूट,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,

देख लुटाने को सूरज अब खोल रहा है अपना पिटारा,
पाने की तू कोशिश कर ले, पा जाएगा तू भी सितारा.
कोशिश से ले ले आज, वरना रह जाएगा राज़,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,

अनवरत ये चलती नदिया, कह रही है चलता जा,
काम अभी तू कर ले अपना आगे का है भरोषा क्या?
श्रम से मिलता सुख, जो सोये पता है वो दुःख.
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,
हाँ हाँ मुसाफिर तू भी जग जा.

आशीष यादव "राजा रुपर्शुखम"

Views: 1034

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rash Bihari Ravi on August 25, 2011 at 4:11pm

देख लुटाने को सूरज अब खोल रहा है अपना पिटारा,
पाने की तू कोशिश कर ले, पा जाएगा तू भी सितारा.

 

vah kya bat hain

Comment by monika on August 25, 2011 at 2:54pm

वाह बहुत खूब कविता लिखी हे आपने बधाई स्वीकार करे

Comment by Veerendra Jain on August 25, 2011 at 11:39am

जग जाएगा तो पायेगा जग में सुन्दर अमूल खजाना,
सोकर खोकर समय चूकि फिर रह जाए पीछे पछताना .
समय के रहते जाग, की अपना हिस्सा ले तू आज,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा..

 

bahut hi badhiya ashish ji...bahut bahut badhai aapko is rachna per..

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on August 25, 2011 at 9:43am

bahut hi sundar,manmohak

dhanyabad

Comment by satish mapatpuri on August 25, 2011 at 1:29am

अनवरत ये चलती नदिया, कह रही है चलता जा,
काम अभी तू कर ले अपना आगे का है भरोषा क्या?
श्रम से मिलता सुख, जो सोये पता है वो दुःख.
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,
बहुत बढ़िया आशीष जी , शुक्रिया

 

Comment by आशीष यादव on August 13, 2010 at 12:54pm
aap logo ne saraaha meri kawita ko, mai dhanya ho gaya, aage bhi aap log apna pyaar dete rahe

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 13, 2010 at 7:55am
बहुत ही सुंदर जागरण गीत लिखा है आशीष जी आपने, प्रतिभा आप मे है ऐसे ही लिखते रहे , बढ़िया लिख रहे है, बधाई,
Comment by आशीष यादव on August 12, 2010 at 9:35pm
rachana sarahne ke liye mai MANOJ JI aur PRITAM JI ko dhanyawaad deta hu aur gujaris karta hu ki aap log aise hi mujhe saraahate rahe
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 12, 2010 at 8:40pm
bahut badhiya ashish jee....hume to pata hi nahi tha ki aapka aisa bhi roop hoga...aap to chupe rustam nikle janab.....

bahut hi badhiya rachna hai ashish bhai.
bahut bahut dhanybaad yahan humlogo ke beech share karne ke liye....

aapka hi apna..
preetam kumar tiwary
ranchi
8051853108

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
14 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
15 hours ago
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Apr 25
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Apr 25
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service