For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुछ बदला-बदला सा ये जहां नज़र आता है, 

राह अब भी है वही पर, अजनबी सा नज़र आता है

तन तो हमेशा ही अपना था मगर,

न जाने क्यों अब पराया सा नज़र आता है

 

ज़िंदगी को हमने कुछ यूं गुज़रते देखा

जैसे रेत को बंद मुट्ठी से फिसलते देखा

ज़ोर जितना भी लगाया रोकने मे उसे

छोटे से छेद से जिंदगी को निकलते देखा

एक आहट सी हुई किसी के आने की जैसे

साँसो मे घुल सी गयी किसी की खुशबू जैसे

इस खुशबू से मेरा वास्ता एक अरसे से रहा

रूह मे समा गयी हो कोई भूली सी तस्वीर जैसे

किसी के आस मे हम ये नज़रें बिछाये बैठे है

वैसे तो खत्म हैं फिर भी खुद को जिलाए बैठे है

कुछ पल को ही सही सुकूने-रूह मिल जाए

इसी इंतज़ार मे अपने जनाज़े से कहीं दूर जाकर बैठे है

हर बीतता पल अगले को कुछ बोल गया

सब खाली ही रहना है राज़ ये खोल गया

चाहे जितना भी समेटों तुम राहे-ज़िंदगी मे

झोली मे छेद है सभी के पर सबका ईमान डोल गया

अपने सर पर कर्ज़ तमाम रक्खा है

अपनी झोली से ज्यादा समान रक्खा है

मंजिल हैं दूर और राह जरा भी आसान नहीं

हमने सितारों से आगे अपना मुकाम रक्खा है

मिलना ही चाहो तो कोई भी दूर नहीं होता

 जो दिल  से हो मजबूर कभी मगरूर नहीं होता

वैसे तो कई बहाने हैं न मिलने के लेकिन

फितरत से जो खुश हो गमो से चूर नही होता

"मौकिल व अप्रकाशित"

अमन सिन्हा 

Views: 130

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 3, 2021 at 6:22am

आ. भाई अमन जी, अभिवादन। अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by AMAN SINHA on October 2, 2021 at 11:09am

@विजय निकोरे साहब, 

धन्यवाद 

Comment by vijay nikore on September 30, 2021 at 12:47pm

पढ़ कर आनन्द आ गया।

बधाई

Comment by AMAN SINHA on September 28, 2021 at 9:53am

@समर कबीर साहब, 

धन्यवाद 

Comment by Samar kabeer on September 27, 2021 at 4:11pm

जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

(ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है

1222 - 1222 - 1222 - 1222फ़क़त रिश्ते जताने को यहाँ मेरी ज़रूरत है अज़ीज़ों को सिवा इसके कहाँ मेरी…See More
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसकी आदत है घाव देने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसकी आदत है घाव देने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई चेतन जी, गजल पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन व सुझाव के लिए हार्दिक धन्यवाद । बदलाव का प्रयास करता…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दूर तम में बैठकर वो रोशनी अच्छी लगी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद."
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"बहुत बहुत शुक्रिया आदणीय अमीरुद्दीन जी...सादर"
14 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post यह भूला-बिसरा पत्र ...तुम्हारे लिए
"मेरे "प्यार", मेरे "प्राण-रत्न" मेरे बाद तुम बहुत दिन जीना रोना नहीं तब मेरे…"
14 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी। बेहतरीन दोहे।"
16 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post रहीम काका - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय सुशील सरना जी।"
17 hours ago
vijay nikore posted a blog post

यह भूला-बिसरा पत्र ...तुम्हारे लिए

तेरे स्नेह के आंचल की छाँह तलेपल रहा अविरल कैसा ख़याल है यहकि रिश्ते की हर मुस्कान कोया ज़िन्दगी की…See More
18 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post श्रध्दांजलि
"आदरणीय भाई समर जी, सराहना के लिए आभारी हूँ।"
18 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post श्रध्दांजलि
"आदरणीय मित्र विजय शंकर  जी, सराहना के लिए आभारी हूँ।"
18 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post यह भूला-बिसरा पत्र ...तुम्हारे लिए
"आदरणीय भाई लक्ष्मण जी, सराहना के लिए आभारी हूँ।"
18 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service