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सृष्टि का संगीत

उस असीम , विराट में 
इस सृष्टि का संगीत
ताल,लय,सुर से सुसज्जित 
नित्य नव इक गीत

नृत्य करती रश्मियाँ 
उतरें गगन से भोर
मृदु स्वरों की लहरियों पर
थिरकतीं चँहु ओर

गगन पर जब विचरता 
आदित्य , ज्योतिर्पुंज
विसहँते सब वृक्ष,पर्वत,
नदी ,पाखी , कुन्ज

.

मौलिक  एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on December 12, 2020 at 10:43pm

आ0 समर कबीर साहेब एवं बृजेश कुमार 'ब्रज जी

हार्दिक धन्यवाद

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 12, 2020 at 9:30pm

बढ़िया सुन्दर रचना आदरणीया...

Comment by Samar kabeer on December 10, 2020 at 11:59am

मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

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