For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए.- ग़ज़ल

मापनी 

१२२ १२२ १२२ १२ 

 

कई ख़्वाब देखे मचलते हुए.

तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए.

 

तबस्सुम के पीछे छिपे कितने ग़म,

कभी मोम देखो पिघलते हुए.

 

जहाँ भी हमें सत्य बेबस मिला,

वहीं पर दिखा झूठ फलते हुए.

 

कभी कुछ न सोचा तुम्हारे सिवा, 

मुहब्बत की राहों पे चलते हुए. 

 

जो तुमने बुलाया हमें चाय पर, 

चले आये हम भी उछलते हुए. 

 

अगर सच कहें तो मजा आ गया,

जो देखा रकीबों को जलते हुए.

 

मुहब्बत की राहें न आसान थीं,   

मैं मंजिल पे पहुँचा सँभलते हुए.

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 683

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 3, 2020 at 8:04pm

आदरणीय आशीष यादव  जी सादर नमस्कार

आपकी हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by आशीष यादव on August 26, 2020 at 1:45am

वाह, क्या बात है। बहुत खूब। बधाई स्वीकार हो।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 18, 2020 at 8:39pm

 

आदरणीय Madhu Passi 'महक'  जी सादर नमस्कार

आपकी हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 18, 2020 at 8:38pm

आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार

बहुत दिनों के बाद आपकी उपस्थिति एवं हौसला अफजाई को सादर नमन 

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 18, 2020 at 6:28pm

आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी सादर नमस्कार!उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद। 

Comment by Samar kabeer on August 17, 2020 at 4:37pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 13, 2020 at 11:01am

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सादर नमस्कार 

आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 13, 2020 at 7:43am

आ. भाई बसंतकुमार जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
23 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service