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ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ - ग़ज़ल - बसंत

मापनी 2122 1212 22/112

गर कहो तो जनाब हो जाऊँ

तुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ

 

रोज पढ़ने का गर करो वादा

प्रेम की मैं क़िताब हो जाऊँ 

 

मुझको काँटों से डर नहीं लगता 

चाहता हूँ गुलाब हो जाऊँ 

 

गर ज़रूरत पड़े उजालों की

जल के ख़ुद आफ़ताब हो जाऊँ

 

डायरी में अगर मुझे लिख लो 

ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ 

 

तुम मेरे वास्ते सवाल बनो 

मैं सरल सा जवाब हो जाऊँ 

 

जाने कब से यही तमन्ना है 

इश्क़ में क़ामयाब हो जाऊँ

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 485

Comment

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 5, 2020 at 8:25pm

आदरणीय Samar kabeer जी सादर नमस्कार, जी कर दिया, आपकी हौसलाअफजाई का दिल का शुक्रिया 

Comment by Samar kabeer on May 3, 2020 at 6:20pm

//गर कहो तो जनाब हो जाऊँ

तुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ//

जी,ठीक है ।

अरकान भी एडिट कर दें ।

 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 3, 2020 at 5:45pm

आदरणीय Samar kabeer जी सादर नमस्कार, आपकी तरमीम का मुझे हमेशा इंतज़ार रहता है, दिल से शुक्रिया आपका 

मैंने इसमें कुछ और किया देखें शायद आपको पसंद आये 

गर कहो तो जनाब हो जाऊँ

तुम जो देखो वो ख़्वाब हो जाऊँ

 

रोज पढ़ने का गर करो वादा

प्रेम की मैं क़िताब हो जाऊँ 

 

मुझको काँटों से डर नहीं लगता 

चाहता हूँ गुलाब हो जाऊँ 

 

गर ज़रूरत पड़े उजालों की

जल के ख़ुद आफ़ताब हो जाऊँ

 

डायरी में अगर मुझे लिख लो 

ज़िंदगी का हिसाब हो जाऊँ 

 

तुम मेरे वास्ते सवाल बनो 

मैं सरल सा जवाब हो जाऊँ 

 

जाने कब से यही तमन्ना है 

इश्क़ में क़ामयाब हो जाऊँ

Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 3, 2020 at 5:43pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सादर नमस्कार, आपकी हौसला अफजाई  का दिल से शुक्रिया 

Comment by Samar kabeer on May 3, 2020 at 12:48pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'तुम कहो तो जनाब हो जाऊँ

तुम पियो वो शराब हो जाऊँ'

मतले के दोनों मिसरों में 'तुम' शब्द खटक रहा है,ऊला में 'तुम' की जगह "गर" कर सकते हैं ।

अरकान इस तरह लिखें:-

2122 1212 22/112

Comment by नाथ सोनांचली on May 3, 2020 at 11:28am

बसन्त कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन। मतला मजेदार है। डायरी में मुझे लिख लो.... हरेक शेर में कुछ खास है। तरूणाई की बहार आ गयी ग़ज़ल पढ़कर। बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर

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