For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अधूरा था

मेरा ज्ञान

सर्वभक्षी के बारे में

मै जानता था

केवल अग्नि है सर्व भक्षी


मगर

सब कुछ खाते थे वे

सांप, झींगुर,कीट –पतंग

यहाँ तक कि चमगादड़ भी

असली सर्वभक्षी तो ये थे

इन्हें पता था

प्रकृति लेती है बदला

पर उन्हें भरोसा था

कि वे बदल देंगे

अपने ज्ञान-विज्ञान से

विनाश की दशा और गति

पर जब हुआ

विनाश का तांडव्

फिर कोई न बचा पाया

और न कोइ बचा

सारा विश्व कर उठा त्राहिमाम

सांप

और चूहों की तरह

लोग दुबकने लगे

अपनी साँसे रोक

उस घरनुमा बिल में

जहां वे समझ सकते थे

खुद को महफूज

तब मसीहा

घूम रहे थे बेख़ौफ़

हर सड़क पर हर गली में

देख रहे थे

विनाश की लीला

और कालचक्र में फंसे

छटपटाते मनुष्य को

वे हँसते थे

अपना हुनर

अपनी महारत दिखाते थे

और थूक देते थे

बेबश इंसान के मुख पर

(मौलिक / अप्रकाशित )

Views: 82

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on April 26, 2020 at 1:23am

आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन भाव पूर्ण और सोचने को विवश करती उत्तम रचना पर आपको बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 22, 2020 at 4:14pm

आ. भाई गोपाल नारायण जी, सादर अभिवादन । अच्छी समसामयिक रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। एक…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"जनाब कृष मिश्रा गोरखपुरी जी,  //रश्क /ईर्ष्या /जलन/ शत्रुता  मानव को मुसीबतों में ले जाती…"
2 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post पाँच बासंती दोहेः
"नमन, भाई लक्ष्मण  धामी मुसाफिर, दोहे आपको प्रशंसा के योग्य प्रतीत हुए, इसके लिए आपका हृदय से…"
4 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post पाँच बासंती दोहेः
"नमन, भाई नाथ सोनांचली! ! दोहे आपको अच्छे लगे, मेरा प्रयत्न सफल हो गया ! मेरा आपको अशेष आभार, !"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post शम्स हरदम छुपा नहीं रहता......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"प्रिय  Rupam kumar -'मीतसादर अभिवादन एक बहतरीन ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें,जैसा…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post गीत
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । वसंत पर मनमोहक गीत हुआ है । बहुत बहुत बधाई ..."
6 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी : वृद्ध
"आदरणीय नाथ सोनांचली जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।अवगत हुआ। हार्दिक आभार।"
6 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post गीत
"नमन, श्याम नारायन वर्मा जी, 'गीत' को कोई  पारखी मिला, रचना और सृष्टा  दोनों…"
6 hours ago
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post वोट देकर मालिकाना हक गँवाया- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"भाई  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सादर अभिवादन एक और बहतरीन ग़ज़ल के लिए…"
6 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post शम्स हरदम छुपा नहीं रहता......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
" मुहतरम  अमीरुद्दीन 'अमीर साहिबआदाबग़ज़ल पर आपकी शिर्कत ,क़ीमती इस्लाह और…"
6 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post शम्स हरदम छुपा नहीं रहता......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"उस्ताद -ए - मुहतरम Samar kabeer साहिबआदाबग़ज़ल पर आपकी शिर्कत ,क़ीमती इस्लाह और हौसला अफ़जाई…"
6 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service