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कोरोना के विरुद्ध पाँच दोहे (गणेश बाग़ी)

(1)

सुनी सुनाई बात पर, मत करना विश्वास ।
चक्कर में गौमूत्र के, थम ना जाए श्वास ।।

(2)

कोरोना से तेज अब, फैल रही अफ़वाह ।
सोच समझ कर पग रखो, कठिन बहुत है राह ।।

(3)
कोरोना के संग यदि, लड़ना है अब जंग ।
धरना-वरना बस करो, बंद करो सत्संग ।।

(4)
साफ सफाई स्वच्छता, सजग रहें दिन रात ।
दें साबुन से हाथ धो, कोरोना को मात ।

(5)

मुश्किल के इस दौर में, मत घबराओ यार ।
बस वैसा करते रहो, जो कहती सरकार ।।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by सूबे सिंह सुजान on March 22, 2020 at 10:31pm

बहुत प्रेरणा पद हैं 

Comment by Samar kabeer on March 22, 2020 at 9:23pm

जनाब गणेश जी 'बाग़ी' साहिब आदाब, दोहों का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'कोरोना से तेज अब, फैल रहा अफवाह'

इस पंक्ति में 'अफ़वाह' शब्द स्त्रीलिंग है,इसलिए 'रहा' को "रही" कर लें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 20, 2020 at 3:40pm

आ. भाई गणेष जी बागी, सादर अभिवादन । वर्तमान परिप्रेक्ष मे सुंदर, प्रेरणादाई दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by Shyam Narain Verma on March 20, 2020 at 10:40am
नमस्ते जी, सुंदर दोहों के माध्यम से बहुत ही कीमती राय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद और हार्दिक बधाई l सादर

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