For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ (137)

एक परम्परागत ग़ज़ल ( 121 22 *4 )
अगर हक़ीक़त में प्यार था तो सनम हमारे मज़ार जाएँ
कि आरज़ू है अक़ीदतों का वो सबसे पहले दिया जलाएँ
**
अगर अभी तक है याद बाक़ी तो इल्तज़ा है करें इनायत
हिना लगाकर वो दस्त-ओ-पा पर हमारा रोज़-ए-फ़ना मनाएँ
**
हमारी ख़ातिर दुआ न मांगें कि जन्नतें हों हमें भी हासिल
वतन में अम्न-ओ-सुकूँ की ख़ातिर वो अपने दस्त-ए-दुआ उठाएँ
**
फ़ना हुए हम रक़ीब से अब अदु-गरी और दोस्ती क्या
उन्हें दिया हक़ रक़ीब से वो ख़ुशी से अब सिलसिले बढ़ाएँ
**
निचोड़ कर दिल का ख़ून हमदम लिखे थे सारे ख़तूत हमने
ज़रा सी कीजे सनम इनायत न ख़त हमारा कोई जलाएँ
**
हमारी यादों का वो खज़ाना तमाम चाहें तो दफ़्न कर दें
यही वसीयत लिखी है हमने कि हिज्र की वो सज़ा न पाएँ
**
जहाँ में होता फ़ना जो कोई जहाँ का रुकता न काम जानाँ
यही है अच्छा कि भूलकर सब हयात में नौ क़दम बढ़ाएँ
**
नसीब में जितनी थी मुहब्बत हमें वो हासिल हयात में थी
हमें न शिकवा-गिला है कोई यही है हसरत वो मुस्कराएँ
**
'तुरंत' अब तक की नज़्म हमने हज़ारों ग़ज़लें उन्ही के दम पर
यही है चाहत पसे-फ़ना वो कलाम अपना ये गुनगुनाएँ
**
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी
"मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 323

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on December 1, 2022 at 10:19pm

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर साहेब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 1, 2022 at 9:27pm

आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on November 27, 2022 at 6:23pm

आदरणीय , समर कबीर साहेब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |

Comment by Samar kabeer on November 27, 2022 at 2:26pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I 

'यही है अच्छा कि भूलकर सब हयात में नौ क़दम बढ़ाएँ' --- इस मिसरे में 'नौ क़दम' की तरकीब पर ग़ौर करें I 

''तुरंत' अब तक की नज़्म हमने हज़ारों ग़ज़लें उन्ही के दम परग'--- इस मिसरे में 'की' की जगह "कीं" होना चाहिए, देखें I 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
2 hours ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
14 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service