For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, सामूहिक दुष्कर्म
क्रूर दरिन्दे भेड़िये, क्या जाने सत्कर्म।।1

जाएँ तो जाएँ किधर, चहुँ दिशि लूट खसोट
दानव सदा कुकर्म के, दिल पर करते चोट।।2

आये दिन ही राह में, होता अत्याचार।
छुपे हुए नर भेड़िये, करते रोज़ शिकार।।3

हवसी नर जो कर रहा, सारी सीमा पार।
सरेआम हैवान को, अब दो गोली मार।।4

शैतानों की चाल से, बढ़े रोज व्यभिचार।
रोम-रोम विचलित हुआ, सुनकर चीख पुकार।।5

खूनी पंजे कर रहे, रोज घिनौने काम।
कुछ बहसी ही देश को, करते हैं बदनाम ।।6

ऐसा कड़ा विधान हो, करे स्वप्न साकार।
बहन बेटियाँ कब तलक, सहन करेंगीं वार।।7

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 69

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on December 8, 2019 at 3:10pm

परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ,दोहा छंद में लिखी मेरी रचना मान पाकर सफल हुई, आपका दिल से बहुत बहुत आभार

Comment by Samar kabeer on December 8, 2019 at 2:45pm

जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

कृपया रचना के साथ उसकी विधा भी लिखा करें ।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on December 7, 2019 at 12:12pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए आपका दिल से आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 7, 2019 at 11:11am

आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन। समसामयिक विषय पर उत्तम दोहे रचे हैं । हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"रामनगर एक्सप्रेस  ****************एक का नाम तो अब्दुल्ला ही था पर दूसरे का दीवाना नहीं था। पर…"
55 minutes ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post आख़िर नुक़सान हमारा है
"हार्दिक आभार आपका"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय। मानवेतर लघुकथा चंद प्रतीकों में कहते हुए बहुत से मुद्दे उभारे गये हैं…"
1 hour ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"                सवाल तब हवा भी कैद थी। बलिष्ठ बाहों में…"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post माइल नहीं हुआ (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, बहुत बहुत शुक्रिया आपके मेहर-ओ-करम का।"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"आदाब। वास्तव में आप एक बढ़िया लघुकथा कहने जा रहे थे, लेकिन विवरण अधिक हो गया। बहुत बढ़िया कथानक व…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"आदाब। रचना पढ़कर लगभग हर पाठक को अपने अनुभव याद हो आयेंगे। ऐसे ही आत्मविश्वासी दृढसंकल्पित दिव्यांग…"
2 hours ago
VIRENDER VEER MEHTA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"विषय पर प्रस्तुति तो अच्छी हुयी है भाई तेज वीर सिंह जी, लेकिन जैसा कि आदरणीय योगराज सर ने कहा, मैं…"
2 hours ago
VIRENDER VEER MEHTA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"बेहतरीन लघुकथा आदरणीय बागी सर।  सफर विषय को छू कर निकलती यह रचना विकलांग विषय और विकलांगों की…"
2 hours ago
VIRENDER VEER MEHTA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"प्रदत्त विषय पर अच्छी प्रस्तुति हुयी उस्मानी भाई। अंत में कहा गया वाक्य //"केवल नंगों का वार…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दिल्ली जलती है जलने दे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"//कब कहता हूँ आम आदमी मुझको अपने पैसे देहो सकता है तुझ से कुछ तो कुर्वानी में बच्चे दे।।दिल्ली जलती…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post माइल नहीं हुआ (ग़ज़ल)
"// ये दिल इबादतों पे क्यूँ माइल नहीं हुआ     मुनकिर न था तो क्यूँ भला क़ाइल नहीं…"
3 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service