For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज पर कुछ दोहे :

आज पर कुछ दोहे :

झूठ सरासर भूख से, तन बनता बाज़ार।
उजले बंगलों में चलें, कोठे कई हजार।।

नज़रें मंडी हो गईं, नज़र बनी बाज़ार।
नज़र नज़र में बिक गया, एक तन कई बार।।

नज़रों में है प्यार का, झूठ भरा संसार।
प्यार ओट में वासना, का होता व्यापार।।

कलियों का तन नोचतीं, वहशी नज़रें आज।
रक्षक भक्षक बन गए, लज्जित हुआ समाज।।


हुई पुरातन सभ्यता, नव युग हुआ महान।
बेशर्मी पर आज का, गर्व करे इंसान।।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 76

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on August 11, 2020 at 5:55pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।

Comment by Sushil Sarna on August 11, 2020 at 5:54pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिजी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। आदरणीय कम्प्यूटर ठीक न होने के कारण प्रत्युतर में विलम्ब हुआ, दिल से क्षमा चाहूँगा।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on July 11, 2020 at 12:48pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बढ़िया दोहे सृजित किये हैं । बधाई स्वीकार कीजिए

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 7, 2020 at 1:42pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
1 minute ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, दाद के साथ…"
6 minutes ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"जब मैं अपने घर से निकला, जेबें खाली-खाली थीं।सूनी -सूनी आंखें दोनों मां की रोने वाली…"
8 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"जनाब दण्डपाणि 'नाहक़' जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें…"
14 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"जनाब अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें…"
17 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आ. राजेश दी,  सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें। अंतिम शे'र के…"
19 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आ. रचना बहन, सादर अभिवादन । सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
48 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"दुश्मन ने सरहद पर जब जब गन्दी नजरें डाली थीं,तब तब उसने सच मानों अपनी कब्रें खुदवाली थीं। चर्चा…"
48 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"ग़ज़लअपनी उलफत से पुर आँखें हम ने जिन पर डाली थीं lवो सब अपना कहते कहते धोका देने वाली थीं l जिन से…"
55 minutes ago
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"अच्छी तरही ग़ज़ल का प्रयास हुआ आदरणीया रचना जी। "
1 hour ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीया रचना भाटिया जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"जनाब अमित कुमार 'अमित' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति मार्ग दर्शन और हौसला अफ़ज़ाई के…"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service