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साथ करवाचौथ का त्यौहार करके-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२२
****
खुश हुआ अंबर धरा से प्यार करके
साथ करवाचौथ का त्यौहार करके।१।
*
चूड़ियाँ खनकें  हिना का रंग हँसता
स्वप्न सजनी के सभी गुलज़ार करके।२।
*
चाँद का पथ तक रहीं बेचैन आँखें,
लौट आओ कह स्वयं उपहार करके।३।
*
रूठना पलभर मनाना उम्रभर को
प्यार में सजनी ने यूँ इकरार करके।४।
*
मान अम्बर क्यों न जाये रीझने को
जब रिझाती  हो  धरा शृंगार करके।५।
*
भर दिवस उपवास कर माँगी दुआ है
चाँद फल दे  उम्र  का  विस्तार करके।६।
*
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

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Comment

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Comment by Ravi Shukla on November 16, 2025 at 9:43am

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत अच्छी गजल आपने कहीं करवा चौथ का दृश्य सरकार करती  इस ग़ज़ल के लिए बहुत-बहुत बधाई।  चौथे शेर में हमें कुछ मिसिंग लग रहा। सजनी ने इक़रार करके....क्या ?  सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 10, 2025 at 6:36am

आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on October 9, 2025 at 10:23pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, करवा चौथ के अवसर पर क्या ही खूब ग़ज़ल कही है। इस बेहतरीन प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर

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