For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दोहा पंचक. . . . .परिवार

दोहा पंचक. . . . . परिवार

साँझे चूल्हों के नहीं , दिखते अब परिवार ।
रिश्तों में अब स्वार्थ की, खड़ी हुई दीवार ।।

पृथक- पृथक चूल्हे हुए, पृथक हुए परिवार ।
आँगन से ओझल हुए, खुशियों के त्यौहार ।

टुकड़े -टुकड़े हो गए, अब साँझे परिवार ।
इंतजार में बुझ गए, चूल्हों  के  अंगार ।।

दीवारों में खो गए, परिवारों के प्यार ।
कहाँ  गए वो कहकहे, कहाँ गए विस्तार ।।

सूना- सूना घर लगे, आँगन लगे उदास ।
मन को कुछ भाता नहीं,  रहे न अपने पास  ।।

सुशील सरना / 9-8-24

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 85

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on August 22, 2024 at 9:13pm

आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । सर  इंतजार में बुझ ....मेरा  आशय  इस बात से है कि जब परिवार संयुक्त होता है तो मुखिया को साँझ होते ही हर सदस्य के  आने का इंतजार होता है साथ बैठकर भोजन करने का इंतजार होता है जो वर्तमान परिवेश  में समाप्त सा हो गया है, बस कुछ ऐसा ही भाव व्यक्त करने का मैंने प्रयास किया है । दूसरे दोहे में जब परिवार बिखर गया तो कौन अपने पास रहा । यही बात कहने का प्रयास किया है मैंने सर । आपके  अमूल्य सुझाव का दिल से आभार आदरणीय ।

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 22, 2024 at 7:14pm

आदरणीय सुशील सरना जी सादर, बदलते परिवेश में टूटते परिवारों की पीड़ा को स्वर देती अच्छी दोआवाली रची है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिर भी कुछ दोहों के भाव स्पष्ट करने के लिए कार्य करने की आवश्यकता है. सादर 

टुकड़े -टुकड़े हो गए, अब साँझे परिवार ।
इंतजार में बुझ गए, चूल्हों  के  अंगार ।।......इस दोहे में 'इंतज़ार' किस बात का ? यह स्पष्ट नहीं है. 

सूना- सूना घर लगे, आँगन लगे उदास ।
मन को कुछ भाता नहीं,  रहे न अपने पास  ।।........इस दोहे का अंतिम चरण 'रहे न अपने पास' किस लिए कहा गया है स्पष्ट नहीं हो रहा है. सादर 

Comment by Sushil Sarna on August 12, 2024 at 12:51pm

आदरणीय दयाराम जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी ।

Comment by Dayaram Methani on August 11, 2024 at 10:03pm

आदरणीय सुशील सरना जी, वर्तमान हालात पर सुंदर सामयिक दोहे। बधाई स्वीकार करें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, पोस्ट पर आने एवं अपने विचारों से मार्ग दर्शन के लिए हार्दिक आभार।"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार। पति-पत्नी संबंधों में यकायक तनाव आने और कोर्ट-कचहरी तक जाकर‌ वापस सकारात्मक…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदाब। सोशल मीडियाई मित्रता के चलन के एक पहलू को उजागर करती सांकेतिक तंजदार रचना हेतु हार्दिक बधाई…"
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार।‌ रचना पटल पर अपना अमूल्य समय देकर रचना के संदेश पर समीक्षात्मक टिप्पणी और…"
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर समय देकर रचना के मर्म पर समीक्षात्मक टिप्पणी और प्रोत्साहन हेतु हार्दिक…"
9 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, आपकी लघु कथा हम भारतीयों की विदेश में रहने वालों के प्रति जो…"
9 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय मनन कुमार जी, आपने इतनी संक्षेप में बात को प्रसतुत कर सारी कहानी बता दी। इसे कहते हे बात…"
9 hours ago
AMAN SINHA and रौशन जसवाल विक्षिप्‍त are now friends
9 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रेत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Dayaram Methani जी, लघुकथा का बहुत बढ़िया प्रयास हुआ है। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक…"
11 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"क्या बात है! ये लघुकथा तो सीधी सादी लगती है, लेकिन अंदर का 'चटाक' इतना जोरदार है कि कान…"
12 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani जी, अपने शीर्षक को सार्थक करती बहुत बढ़िया लघुकथा है। यह…"
12 hours ago

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service