For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

122     122     122     122

हक़ीक़त जुदा थी कहानी अलग है
सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  है

ये गरमी की बारिश सुकूँ है अगरचे
मग़र आँख से बहता पानी अलग है

है खानाबदोशों की ख़ामोश  बस्ती
यहाँ ज़िन्दगी का मआनी अलग  है

मियां  शायरी  को ज़रा  मांजियेगा
कहे ऊला कुछ और सानी अलग है

पढ़ें गौर से  जल्दबाजी  न  कीजे
ग़ज़ल  की मधुरता रवानी अलग है

सँजोता नहीं 'ब्रज' ह्रदय में किसी को
तसव्वुर  तेरा  शादमानी  अलग  है

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 543

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 19, 2022 at 4:05pm

आ. भाई ब्रिजेश जी, सादर अभिवादन। बहुत सुन्दर इजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 11, 2022 at 4:30pm

आदरणीय अवनीश जी सादर धन्यवाद

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 11, 2022 at 4:29pm

आदरणीय अमीरुद्दीन जी सुधार किए हैं...हाँ मआनी के लिए कुछ उचित अभी कर नहीं पाया...लेकिन उसमें भी सुधार हो सकता है।

एक बार फिर आपका हार्दिक धन्यवाद

Comment by Awanish Dhar Dvivedi on August 9, 2022 at 11:19pm
सुन्दर सृजन। हार्दिक शुभकामनायें।
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 9, 2022 at 5:39pm

//मैंने भी "ज़िन्दगी का" शब्द लिया है ..."ज़िन्दगी के" नहीं...थोड़ा सा और प्रकाश डालें क्या "ज़िन्दगी का" लेना उचित नहीं है??//

आदरणीय ब्रज जी , मानी=अर्थ (एकवचन), मआनी= अनेकार्थ (बहुवचन)

अब आप ख़ुद फ़ैसला कर लें। 

1. यहाँ ज़िन्दगी का मआनी (अनेकार्थ) अलग है, (व्याकरण की दृष्टि से ग़लत वाक्य विन्यास) 

2. यहाँ ज़िन्दगी का मानी (अर्थ) अलग है, (बह्र से ख़ारिज) 

3. यहाँ ज़िन्दगी के मआनी (अनेकार्थ) अलग हैं (रदीफ़ बदल रही है) 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 9, 2022 at 11:49am

आदरणीय अमीरुद्दीन जी मैंने भी "ज़िन्दगी का" शब्द लिया है ..."ज़िन्दगी के" नहीं...थोड़ा सा और प्रकाश डालें क्या "ज़िन्दगी का" लेना उचित नहीं है??

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 7, 2022 at 10:04pm

जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी, 

//फसाना पूर्णरूप से काल्पनिक हो सकता है लेकिन कहानी कई बार सत्य भी होती है...//

जनाब, फ़साना और कहानी पर्यायवाची शब्द हैं, कहानी सच्ची भी हो सकती है मगर उसे सच्ची कहानी या सत्यकथा कहेंगे। 

//मआनी शब्द बहुवचन है परंतु शहरयार की ग़ज़ल का शेर देखिए

कहते हैं मेरे हक़ में सुख़नफ़ह्म बस इतना

शे'रों में जो ख़ूबी है मआनी से नहीं है। एकवचन लिया गया है// 

जी नहीं, एकवचन नहीं लिया गया है ग़ौर फ़रमाएं, शहरयार यहाँ 'शे'रों की ख़ूूबी' (एकवचन) का ज़िक्र कर रहे हैं, इसलिये यहाँ 'नहीं है' आ रहा है। 

//महमूद अयाज़ की ग़ज़ल का मतला भी देखें

लफ़्ज़ ओ मंज़र में मआनी को टटोला न करो...यहां भी एकवचन ही लग रहा है//

ऐसा नहीं है, यहाँ भी बहुवचन ही लिया गया है। 

... और आप तो मानते भी हैं और जानते भी हैं कि 'मआनी' शब्द बहुवचन है तो फिर मसला ही कोई नहीं है। सादर। 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 7, 2022 at 3:08pm

आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी ग़ज़ल की विस्तृत समीक्षा के लिए हार्दिक आभार आपका...फसाना और कहानी में थोड़ा अन्तर होना चाहिए... फसाना पूर्णरूप से काल्पनिक हो सकता है लेकिन कहानी कई बार सत्य भी होती है...इसलिए फसाना और कहानी अलग अलग लिया है...हालांकि आपका सुझाव "हक़ीक़त" भी बहुत उम्दा है...

ये गरमी की बारिश सुकूँ है अगरचे

मग़र आँख से बहता पानी अलग है.... मिसरों में रब्त का अभाव है, कहन स्पष्ट नहीं है। 

कहन स्पष्ट है आदरणीय... जहाँ तन और मन दोनों व्यथित हैं वहाँ बाहरी बारिश से तन को सुकूँ मिल जाता है लेकिन अंतस की व्यथा से आँखों की बारिश होती है लेकिन वो और अधिक पीड़ादायी है।

है खानाबदोशों की ख़ामोश बस्ती

यहाँ ज़िन्दगी का मआनी अलग है.... 'मआनी' शब्द बहुवचन है, रदीफ़ हैं हो रही है। 

मियां शायरी को ज़रा मांजियेगा

मआनी शब्द बहुवचन है परंतु शहरयार की ग़ज़ल का शेर देखिए

कहते हैं मेरे हक़ में सुख़नफ़ह्म बस इतना
शे'रों में जो ख़ूबी है मआनी से नहीं है। एकवचन लिया गया है इसके अलावा

महमूद अयाज़ की ग़ज़ल का मतला भी देखें

लफ़्ज़ ओ मंज़र में मआनी को टटोला न करो...यहां भी एकवचन ही लग रहा
होश वाले हो तो हर बात को समझा न करो

हाँ उला मैंने गलत ले लिया इसमें सुधार करता हूँ

बाकी शेर भी सुधारने योग्य हैं...आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 6, 2022 at 9:52pm

पुनश्च:

//पढ़ो गौर से जल्दबाजी न कीजे... कीजै के साथ 'पढ़ो' नहीं 'पढ़ें' चलेगा।//

भूल सुधार :

कीजै के साथ 'पढ़ो' नहीं 'पढ़िये' चलेगा।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 6, 2022 at 5:16pm

जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ख़ूबसूरत ख़याल के साथ ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।

फ़साना जुदा था कहानी अलग है.... जनाब फ़साना और कहानी एक ही बात है। 

सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग है.... ऊला यूँ कर सकते हैं - हक़ीक़त जुदा थी... 

ये गरमी की बारिश सुकूँ है अगरचे

मग़र आँख से बहता पानी अलग है.... मिसरों में रब्त का अभाव है, कहन स्पष्ट नहीं है। 

है खानाबदोशों की ख़ामोश बस्ती

यहाँ ज़िन्दगी का मआनी अलग है.... 'मआनी' शब्द बहुवचन है, रदीफ़ हैं हो रही है। 

मियां शायरी को ज़रा मांजियेगा

उला कुछ कहे और सानी अलग है... उला नहीं 'ऊला'.. यूँ कर सकते हैं- कहे ऊला कुछ और.. 

पढ़ो गौर से जल्दबाजी न कीजे..... कीजै के साथ 'पढ़ो' नहीं 'पढ़ें' चलेगा। 

ग़ज़ल की मधुरता रवानी अलग है

शग़ल तो नहीं 'ब्रज' फ़क़त याद करना.... भाव स्पष्ट नहीं हुआ। 

तसव्वुर तेरा शादमानी अलग है.... ऊला यूँ कर सकते हैं - 'मैं यादें सभी की संजोता नहीं 'ब्रज'.... शुभ-शुभ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
46 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
14 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
14 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
16 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Monday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Sunday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
May 30
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service