For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल- नूर की .. शेख़ ओ बरहमन में यारी रहेगी

जो शेख़ ओ बरहमन में यारी रहेगी
जलन जलने वालों की जारी रहेगी.
.
मियाँ जी क़वाफ़ी को समझे हैं नौकर  
अना का नशा है ख़ुमारी रहेगी.  
.
गले में बड़ी कोई हड्डी फँसी है
अभी आपको बे-क़रारी रहेगी.
.
हुज़ूर आप बंदर से नाचा करेंगे
अकड आपकी गर मदारी रहेगी.
.
हमारे ये तेवर हमारे रहेंगे
हमारी अदा बस हमारी रहेगी.
.
हुज़ूर इल्तिजा है न हम से उलझिये
वगर्ना यूँ ही दिल-फ़िगारी रहेगी.
.
ग़ज़ल “नूर” तुम पर न ज़ाया करेंगे
करेंगे तो वो तुम से भारी रहेगी.  
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

Views: 1063

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on October 30, 2020 at 2:52pm

जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

Comment by सालिक गणवीर on October 30, 2020 at 2:37pm

Comment by सालिक गणवीर 1 second agoDelete Comment

भाई निलेश ' नूर' जी
सादर अभिवादन
भाई क्या ग़ज़ल कही आपने,वाह। एक एक लफ्ज़ और हर एक अशआर के लिए तह -ए -दिल से दाद और मुबारक़बाद क़ुबूल करें।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 30, 2020 at 9:22am

आ. चेतन प्रकाश जी,
आप वरिष्ठ हैं और मैं आपके जैसे वरिष्ठ सदस्य के भी ग़ज़ल के मर्म को समझने में सहायक हुआ यह मेरे लिए विशेष योग्यता मिलने के समान है..
पता नहीं आप किस तरफ इशारा करना चाहते हैं लेकिन जिसे आप नफ़रत निरुपित कर रहे हैं वह दरअसल शाइर का फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन है जिस में वो बिना एक भी ग़लत लफ्ज़ कहे, बिना हिंसा किये कई बदज़ुबानों की ज़ुबान खेंच लेता है.. कई कथितों के साहित्यिक विषदंत तोड़ कर आत्मिक विष को उसी के कंठ में धारण करवा देता है... ग़ज़ल कनस्तर में कंकर होने का मर्म तो मैं नहीं समझ पाया लेकिन ग़ज़ल के शंकर हलाहल पीने की जगह कथित उस्तादों को पिला कर ही पूर्णता को प्राप्त होते हैं.
ग़ालिब का मशहूर वाक़या तो सुने ही होंगे जब सडक से गुज़रते उस्ताद ज़ौक को उन्होंने कह दिया था कि-
बना  है शाह का मुसाहिब फिरे है इतराता .... जिसकी शिकायत दरबार में किये जाने पर उन्होंने तुरंत फिल्बदी ग़ज़ल कही जो बाद में ग़ालिब का ट्रेड मार्क बन गयी--हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू  क्या है... यू ट्यूब पर सीरियल की लिंक उपलब्ध है.. अवलोकनार्थ  भेज रहा हूँ ..
.
https://www.youtube.com/watch?v=HNH0dN_k_wk 

इसके साथ ही राहत इन्दौरी जी का मशहूर दतिया मुशायरा भी सुनने लायक है जो यू ट्यूब पर उपलब्ध है.. बड़े मज़े का है.. देखिएगा ज़रूर..
रही बात अना के बे-तरह प्रदर्शन की ..तो अभिमान और स्वाभिमान में महीन सा धागे जितना फ़र्क होता है.. 
अब किसी के गले में कुछ फँस जाए जो उस बेचारे से न निगलते बनें, न उगलते बनें.. किसी के आपसी प्रेम से , परस्पर सम्मान से कुढ कर किसी  के मिसरे निकलना बन्द हो जाएं .. बह्र कह्र ढाने लगे.. क़ाफिये पनाह माँगने लगें.तुकबन्तोदी..ग़ज़ल के लेबल से बेची जाने लगे तो  ऐसे जातक  की पीढ़ा को शब्द देना भी साहित्यिक कर्तव्य है, जिसे यदि मैं न करता तो शायद कामचोरी करता..
आशा है आप नफ़रत का बीज मन में रखने वालों को भी टिप्पणी से समुचित फटकार लगाएंगे ... 
सादर व् सप्रेम  

Comment by Chetan Prakash on October 29, 2020 at 11:52pm

भाई, नीलेश बहदुर 'नूर' साहब, ज़िन्दगी के सड़सठ वर्ष बिताने के बाद आज जाकर,( आपकी ग़ज़ल पढ़कर ), कहीं ग़जल का मर्म समझ आया । मालूम हुआ, अपनी पुरखुलूस अंदाज़े बयाँ के लिए मशहूर उर्दू- हिन्दवी जबान में, किस तरह नफरत पिरोयी जाती है। और, अना का बेतरह प्रदर्शन किया जाता है, ग़जल फार्मेट के तो आप निसंदेह बादशाह है। वैसे आपके ज्ञानार्जन के लिए बता दूँ, ग़जल कनस्तर में कंकर नहीं होती।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service