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मौन सरोवर ....

जुदा न होना
मेरे होकर

कैसे कह दूँ तुम स्वप्न हो
मेरी श्वास का तुम दर्पण हो
बोलो प्रिय
कहाँ गए तुम
मेरी पलक में सपने बो कर

जीवनतल की अकथ कथा तुम
प्रेम पलों की मधुर ऋचा तुम
तुम बिन देखो
सूख न जाएँ
अभिलाषा के मौन सरोवर

अभी यहाँ थे अभी नहीं हो
मेरी क्षुधा की सुधा तुम्हीं हो
जीवन दुर्लभ
तुमको खोकर
तुम अंतस की अमर धरोहर

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 515

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Comment by Sushil Sarna on June 3, 2020 at 9:10pm

आदरणीय  pratibha pandeजी सृजन के भावों पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। कुछ तकनीकी व्यवधान के चलते मैं आभार व्यक्त न कर सका। इसके लिए क्षमा चाहूंगा। सादर ।

Comment by Sushil Sarna on June 3, 2020 at 9:10pm

आदरणीय Samar kabeer जी सृजन के भावों पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। कुछ तकनीकी व्यवधान के चलते मैं आभार व्यक्त न कर सका। इसके लिए क्षमा चाहूंगा। सादर ।

Comment by Sushil Sarna on June 3, 2020 at 9:10pm

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी सृजन के भावों पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। कुछ तकनीकी व्यवधान के चलते मैं आभार व्यक्त न कर सका। इसके लिए क्षमा चाहूंगा। सादर ।

Comment by pratibha pande on May 24, 2020 at 12:42pm

खूबसूरत रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 24, 2020 at 12:29pm

आ. भाई सुशील जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई । 

Comment by Samar kabeer on May 21, 2020 at 2:35pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

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