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जायदाद के हकदार

अम्मा का जाना
जैसे पर्दों का हट जाना
एक- एक कर सारे के सारे तार- तार हो गए
जिगर के सब टुकड़े जायदाद के हकदार हो गए

छोटे छोटे पुर्जे तक बांटे गए
सारे कागज़ पत्र तक छांटे गए
जिगर के टुकड़े थे वो सारी जायदाद के हकदार हो गए
 
कुछ चीज़ें नहीं छुई किसी ने माँ की
कुछ लावारिस हसरते
कुछ सवाल कुछ मलाल
किसी ने नहीं छूए
उनके आदर्श
सब कोने मे पड़े बेचारे
केवल वही रहे जो अनाथ हो गए
जिगर के टुकड़े थे वो बाकि जायदाद के हकदार हो गए
.....
मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by amita tiwari on February 19, 2020 at 8:38am

अरुण जी 

सराहना के लिए आभार 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 18, 2020 at 11:23am

आ. अमिता जी, यथार्थपरक रचना के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by amita tiwari on February 17, 2020 at 11:56pm

रवि जी , विजय जी 

उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार 

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on February 17, 2020 at 2:36pm

आदरणीय अमिता जी, इस भावपूर्ण सुन्दर रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

Comment by vijay nikore on February 17, 2020 at 12:57pm

सचाई से भरपूर सुन्दर मार्मिक रचना के लिए धन्यवाद, मित्र अमिता जी ।

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