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Kumar gourav's Blog (2)

कर्जा

कर्जा

दूर तक सुनहरा रंग चमक रहा है गेहूं की फसल पककर तैयार है। दूर दूर तक जहाँ तक नजर जाती है बस वो बूढा बरगद ही हरियाली का परचम उठाये है वरना हर तरफ सुनहरी चमक से आंखे चुंधिया जाए । मंद मंद बहती पुरवा के साथ गेहूं की बालियां लयबद्ध होकर झूम रही है । सूरज एकदम सर पर सवार है गरमी से बदन जल रहा है । लेकिन रामसुख को तनिक भी परवाह नहीं ,उसका हाथ एकदम तेजी से चल रहा है मानो हाथ में मोटर फिट हो सिर्फ हंसिया की कचर कचर ही गूंज रही है ।

चेहरे के पसीने को गमछे से पोंछकर सर पर रख लिया उसने और… Continue

Added by kumar gourav on March 30, 2016 at 5:43pm — 6 Comments

सहारा

रात की ओलावृष्टि के बाद गांव में मातम का माहौल था । हरिया खेत की मेड पर सर पकडे बैठा था कभी गिरी हुई फसल तो कभी पास में खेलते अपने बच्चों को देख रहा था । मन ही मन सोच रहा था... हे भगवान कैसे पालूंगा बिना मां के इन दोनों बच्चों को अगर किसानी छोड कर मजदूरी भी शुरू कर दूं तो मजदूरी मिलेगी कहां सारा गांव तो छोटे किसानों का ही है जिनके पास बमुश्किल चार पांच बिघे खेत हैं । शहर भी तो नहीं जा सकता इन बच्चों के साथ न रहने का ठौर न काम का ठिकाना । 

रह रहकर उ…

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Added by kumar gourav on January 29, 2016 at 11:28pm — 3 Comments

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