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Manoj kumar Ahsaas's Blog – August 2019 Archive (3)

ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

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मुझको तेरे रहम से मयस्सर तो क्या नहीं

जिस और खिड़कियां है उधर की हवा नहीं

हमको तो तेरी खोज में बस ये पता चला

तेरा पता बस इतना है तू लापता नहीं

उसने तमाम गीत लिखे औरों के लिए

फिर भी वो मेरे दिल के लिए बेवफा नहीं

यूं तो तमाम लोग तरक्की पसंद है

मैं इश्क से अलग कभी कुछ लिख सका नहीं

वह इसलिए ही जीत के बेहद करीब है

क्या-क्या कुचल गया है कभी सोचता नहीं

सबका…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on August 24, 2019 at 11:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल (2×16): मनोज अहसास

पीछे मायूसी का साया आगे खतरा अनजाना है

हर लम्हा ये सोच रहा हूँ खुद को कैसे समझाना है

तेरी यादों का सूरज भी काम नहीं आता अब मेरे

मुझको इस मुश्किल मौसम में खुद से दूर चले जाना है

हम दिल की बातें लिखते हैं दिल न दुखाने की सीमा तक

ऊंची सोच की इस महफिल से हमको जल्द ही उठ जाना है

तेरे खतों की मधुर कहानी सोच से पीछे छूट गई है

पैथोलॉजी की रिपोर्ट का हाथों में एक अफसाना है

मां की हथेली चूम के निकला फौजी बेटा अपने घर…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on August 18, 2019 at 10:30pm — 3 Comments

एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए मनोज अहसास

2×15

कोई अपना साथ न आए, हर कोशिश नाकाम लगे

मेरे पास चले आना जब, जीवन ढलती शाम लगे

इसको पिछले जन्मों का फल,कहते हैं दुनिया वाले

पेड़ बबूल के बोये फिर भी,उसके हाथों आम लगे

बिक जाने की लाचारी का,एक तजुर्बा ये भी है

जितनी ज्यादा खुद्दारी थी,उतने ही कम दाम लगे

चौथ का चांद देखने वाले,पर लगता है झूठा दोष

हमने तो पूनम को देखा फिर भी सौ इल्जाम लगे

टूटा मन है ,रोगी तन है, रिश्तों में बेगानापन

यारो कुछ…

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Added by Manoj kumar Ahsaas on August 7, 2019 at 9:13pm — 4 Comments

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