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Manoj kumar Ahsaas's Blog – July 2015 Archive (3)

ग़ज़ल इस्लाह के लिए (मनोज कुमार अहसास)

2122 2122 2122 212



इश्क़ मे बेहाल होकर इतना हासिल हो गया

तेरी आहट से यहाँ हर लम्हा महफ़िल हो गया



फैसला करना मुझे ये आज मुश्किल हो गया

दिल से मुझको गम मिला या गम से यूँ दिल हो गया



रात सी चादर लपेटे बर्फ से वो सामने

आखिरी लम्हा मेरा जीने के काबिल हो गया



यूँ तो उसने बेबसी के सब फ़साने लिख दिए

ये नहीं कह पाया कैसे खुद का कातिल हो गया



डबडबाया कुछ ज़रा फिर जज्ब सब कुछ हो गया

किस कदर महफूज़ उन झीलों का साहिल हो गया…



Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on July 26, 2015 at 4:00pm — 11 Comments

ग़ज़ल - इस्लाह के लिए

2122 2122 2122 212



या तो चाहत इश्क़ में थी या खुदा पाने में थी

एक समंदर की सी तमन्ना आँख के दाने में थी



बेगुनाही एक जिद इक़बाल जब तेरी ख़ुशी

और मेरी हर सजा तेरे बिछड़ जाने में थी



होश के इस फैसले से क्या मुझे हासिल हुआ

ज़िन्दगी की हर ख़ुशी छोटे से पैमाने में थी



सांस लेता है ये जाने कौन किसका जिस्म है

ज़िन्दगी तो अपनी तेरे गम के वीराने में थी



ये नहीं हासिल हुआ या वो नहीं मुमकिन हुआ

कशमकश ये हर घडी इस दिल को थर्राने में…

Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on July 13, 2015 at 8:30am — 14 Comments

मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल____Manoj kumar ahsaas

सुबह आयी

तेरे इंतज़ार की खुशबू लेकर

फिर तमाम दिन मुझे तेरा इंतज़ार रहा

शाम आयी

तेरे ना आने की मायूसी लेकर

फिर तमाम रात अंधेरो मे ढूढ़ा है तुझे

और बांधी है उम्मीद अगली सुबह से

मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल

तू कहाँ था?

आज आया है

तो मेरी आँखों में चमक ही नहीं

बुझ गया है तेरा इंतज़ार

जला कर खुद को

तुझको पाने को लगाया था खुद को दाँव पर

ऐसा लगता है

तुझ को पाया है खोकर खुद को

मेरी ज़िन्दगी के हसीन पल

तू कहाँ था?

साथ लेकर… Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on July 1, 2015 at 1:45pm — 13 Comments

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