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Munish tanha's Blog (21)

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

दर्द आहों में बदलने क्यूँ लगी कुर्वानियाँ

जान लेने को खड़े तैयार सारे आदमी

हर जगह बढ़ने लगी है आज कल विरानियाँ

घूमते थे रात दिन हम आपकी ही चाह में

जब समझ आया खुदा तो हो गईं आसानियाँ

जोड़ तिनके है बनाया आशियाँ तुम सोच लो

आबरू इस में छुपी है मत करो नादानियाँ

गंध आने है लगी क्यूँ फिर यहाँ बारूद की

याद कर तू बस खुदा को छोड़ बेईमानियाँ

आदमी मजबूर देखो हो गया इस दौर में

खून में शामिल…

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Added by munish tanha on March 10, 2019 at 8:00pm — 3 Comments

इस तरह जिन्दगी तमाम करें

इस तरह जिन्दगी तमाम करें
लोग आ कर हमें सलाम करें
झूठ का अब न एहतराम करें
इस तरह का भी इंतिजाम करें
तू वना खुद को इस तरह शीशा
देख चेहरा सभी सलाम करें
इस तरह वख्श बन्दगी दाता
सुबह से शाम राम-राम करें
आप के हाथ अब नहीं बाजी
आप अब और कोई काम करें
आज तौफिक दे खुदा सबको
देश पर जां लुटा के नाम करें
देख नफरत उदास है “तन्हा”
आस्तां में कहीं कयाम करें
मुनीश “तन्हा”
मौलिक व् अप्रकाशित

Added by munish tanha on November 29, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
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Added by munish tanha on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

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Added by munish tanha on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

जनाब का हुक्म मानकर.... ग़ज़ल

1222-1222-1222-1222



जहां में आप सा हमको कोई कामिल नहीं मिलता

मिले हमको कई अच्छे मगर आकिल नहीं मिलता 



जिन्हें तूफ़ान से लड़ना उन्हें फिर कौन रोकेगा

वही पाते हैं मंजिल को जिन्हें साहिल नहीं मिलता



तुम्हें मालूम है लेकिन बता सकते नहीं किस्सा

अजब घटना घटी देखो हमें फाजिल नहीं मिलता



खुदा मालिक है दुनिया का उसे सबसे मुहब्बत है

सहारा वो नहीं देता कभी साहिल नहीं मिलता



गगन मिट्टी हवा पानी हमें जीने को देता है

बसा…

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Added by munish tanha on January 26, 2017 at 10:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल- दर्द जो नातवां से उठता है

दर्द जो नातवां से उठता है
शोर वो आस्तां से उठता है


गीत भी देख लो छुपे भीतर
दर्द दिल में जहां से उठता है


नाम की भूख ने बदल डाला
क्यूँ धुंआ अब यहाँ से उठता है


प्यार बांटो सदा जमाने में
बोल सच्चा फुगां से उठता है


उम्र बीती समझ नहीं आया
रोज झगड़ा बयां से उठता है


जिंदगी आज बन्दगी 'तन्हा'

नाम उसका ही जां से उठता है....

.
मुनीश 'तन्हा'.
मौलिक व अप्रकाशित

Added by munish tanha on January 24, 2017 at 5:30pm — 5 Comments

ग़ज़ल: यही बात दिल देख मेरा जलाये

१२२-१२२-१२२-१२२



यही बात दिल देख मेरा जलाये

तुझे याद भी क्या जरा हम न आए



मुहब्बत किसी से करो तो पता हो

इशारे से महबूब कैसे बुलाये



गुनाहों ने तुमको कहीं का न छोड़ा

शराफत खड़ी मुंह में ये बुदबुदाये



खुदा प्यार बांटे सभी को हमेशा

यही सोच मुझको सदा गुदगुदाये



बफा साथ लेकर परीक्षा है आती

दुआ है खुदा से मुझे आजमाये



नदी गुनगुनाती हुई बह रही है

मिलन साथ सागर तभी खिलखिलाए

.

 मुनीश…

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Added by munish tanha on July 24, 2016 at 11:30am — 2 Comments

ग़ज़ल : न मुश्किल बढ़ा आजमाने से पहले

                 

122 – 122 – 122 - 122

               

न मुश्किल बढ़ा आजमाने से पहले

नजर को मिला दिल लगाने से पहले

 

सफ़र ज़िन्दगी का रहा फिर अधूरा

खुदा याद आया न जाने से पहले

 

वो दिन रात हलकान पैसे में देखो

करे मोल बाज़ार आने से पहले

 

तुम्हे भी तो आखिर यही सब मिलेगा

जरा सोच लो तुम सताने से पहले

 

मुहब्बत में शर्तें तो होती नहीं हैं

सही पाठ पढ़ लो ज़माने से पहले   

.

गयी…

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Added by munish tanha on June 29, 2016 at 5:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल - बदलना भी ज़रूरी है सदा अच्छा नही रहता

1222-1222-1222-1222

ग़ज़ल

बदलना भी ज़रूरी है सदा अच्छा नही रहता

खुदा से प्यार करते हो तो फिर पर्दा नही रहता

हमारे सामने देखो बना अफसर से वो माली

दिनों का फेर है साहिब सदा पैसा नहीं रहता

बने गद्दारहै जो घूमें करें हैं देश से धोखा

उन्हें फिर मौत मिलती है निशां उनका नहीं रहता

जमीं तिड्की हलक प्यासे तडपते है परिंदे भी

लगाये पेड़ जो होते तो फिर सूखा नही रहता

ये नफरत की हैं दीवारें इन्हें तुम तोड़ दो वरना…

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Added by munish tanha on May 26, 2016 at 9:30am — 3 Comments

ग़ज़ल

2122-2122-212

                 ग़ज़ल   

इस तरह सब पे इनायत कीजिए

बोल कर मीठा इबादत कीजिए    

 

यूँ न दुनिया से बगावत कीजिए

दिल मिला सब से मुहब्बत कीजिए

 

चाँद छत पे आ गया तुम को नज़र

पेश अपनी अब शराफत कीजिए

 

नफरतें सारी ये मिटटी में मिलें

प्यार को ऐसी इमारत कीजिए

 

बोल भारत की जमीं तुमसे रही

माँ समझ कर कुछ तो इज्जत कीजिए 

मुनीश “तन्हा” नादौन 9882892447  (मौलिक…

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Added by munish tanha on May 23, 2016 at 7:17pm — 4 Comments

ग़ज़ल 212 – 212 – 212 – 212

212 – 212 – 212 – 212 ग़ज़ल

किस तरह आप से मैं कहूं प्यार है

जिक्र से ही हुआ दिल जो गुलज़ार है

आपका साथ है और क्या चाहिए

आप ही का बना दिल तलबगार है

जान लो तुम  मुहब्बत तो  है इक बला

इस से बचना बड़ा ही तो दुशवार है

रोग उसको अचानक ही समझो लगा

अब बना घूमता वो तो अख़बार है

जब हकीकत समझ आई तो देर थी

जो हुआ सो हुआ अब तो इकरार है

हुस्न ने लूट लाखों लिए सोच कर

हो गया इक नया जख्म सरकार है

मुनीश…

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Added by munish tanha on May 17, 2016 at 10:30am — 6 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल2122-1212-22
अब तो चेहरा गुलाब लगता है
ना पढ़ी वो किताब लगता है
दर से तेरे खुदा असर पाया
रात दिन अब सबाब लगता है
जब से डूबी है सोहनी इसमें
मुझको कातिल चिनाब लगता है
खुश वो दिखता बहुत है अब सबको
जख्म गहरा जनाब लगता है
प्यार के नाम पर करे झगड़ा
सोच के ही इताब लगता है
मुनीश 'तन्हा'....नादौन...9882892447
मौलिक व अप्रकाशित

Added by munish tanha on May 16, 2016 at 6:04pm — 2 Comments

ग़ज़ल

22-22-22-22-22-22-22-2



सच को लिख कर तुम दुनिया में होने का इज़हार करो

झूठी बातेँ सारी छोड़ो दिल को ना लाचार करो

गर जीवन में मुश्किल आए हिम्मत को मत हारो तुम

शिकवे छोड़ो मन में ठानो फिर ख़ुद को औज़ार करो

कितने अच्छे वो दिन लगते जब हम छोटे बच्चे थे

मम्मी पापा कहते फिरते मत दिन को बेकार करो

नफरत जग में जिसने बांटी देखो उसका हाल बुरा

तोड़ो सारी तुम दीवारें मिल के सबसे प्यार करो

मिट्टी पानी आग हवा केवल जरिया…

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Added by munish tanha on May 7, 2016 at 11:30am — 2 Comments

जख्म दे के हवा करे कोई

2122  -  1212  -  22  

जख्म दे के हवा करे कोई

इस तरह भी वफ़ा करे कोई

 

आप तो मेरी जान हो जानम

देख कर ये जला करे कोई

 

प्यार में शर्त तुम लगाते हो

सोच कर के दगा करे कोई

 

दूर मंजिल तो रास्ता केसा

रात औ दिन चला करे कोई

 

वो बना है मरीज इस खातिर 

पास उस के रहा करे कोई

 

हर कदम झूठ फ़िक्र धोखा है

अब कहाँ तक सहा करे कोई

.

मुनीश “तन्हा” नादौन…

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Added by munish tanha on May 5, 2016 at 9:00pm — 2 Comments

सांस उनको देख कर के है इधर चलने लगी

2122 - 2122 - 2122 - 212 

सांस उनको देख कर के है इधर चलने लगी

कब मिले वो रोज मुझको आरजू रहने  लगी

.

फ़िक्र में हर दम ये दिल डूबा मुझे अब है लगे

उनको अपना है बनाना सोच ये जगने लगी

.

प्यार की गलियाँ बड़ी बदनाम दुनिया में मगर

क्या करें अपनी तबियत जो अगर सजने लगी

.

आप तो हैं हुस्न की तस्वीर जो अनमोल है

ये करिश्मा देख कर दुनिया भी अब जलने लगी

.

ख़ुद खुदा भी सोच के अब है परेशां हो रहा

के बनाकर…

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Added by munish tanha on May 4, 2016 at 1:00pm — 3 Comments

इस तरह इक औ नया रिश्ता यहाँ बनता गया

2122  2122  2122  212

इस तरह इक औ नया रिश्ता यहाँ बनता गया

आप हम से ना मिले औ दिल गरां बनता गया

 

दिल से दिल मिलने लगे जब तो जहाँ बनता गया

प्यार से भरपूर रोशन आशियाँ बनता गया

 

मिल फकीरों की दुआ से फायदा ये है हुआ

घर मेरा भी धीरे - धीरे आस्तां बनता गया

 

मैं पलटने जब चला किस्मत तो खाली हाथ था

मेहनत के साथ फिर तो कारवां बनता गया

 

रोज कुछ बाजार से लाने की आदत बन गयी

और फिर तो घर में मेरे…

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Added by munish tanha on April 28, 2016 at 9:00am — 5 Comments

ग़ज़ल

1222-1222-1222-1222 

दिवाना आप का होकर फिरे वो यार बरसों से

लिए फिरता है दिल में वो तो तेरा प्यार बरसों से

हुआ है ज़िक्र महफ़िल में उसी की बात का लेकिन

बना रहता है वो मजनू करे दीदार बरसों से



अदालत ये अनोखी है जहाँ पे झूठ चलता है

हुए कैदी मिली फांसी जो थे सरदार बरसों से



जरा दिल की सुनो तो जी बड़ा मासूम भोला है

पड़ा धोखे में जाकर ये लुटा घर बार बरसों से



मेरे मौला सफर में हूँ अता कर फ़िक्र ना मुझको

दे वो ढूँढा…

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Added by munish tanha on April 25, 2016 at 10:00pm — 3 Comments

ग़ज़ल

1222 -1222-1222-1222

उन्हें ढूंढे मेरी ऑंखें बनी बीमार बरसों से

निकलता ही नहीं दिल से मेरा दिलदार बरसों से

नहीं काबू रहा ये दिल, तेरी उल्फ़त का जादू है 

धड़कता है मचल कर ये मेरी सरकार बरसों से

किया है वायदा उसने कि अच्छे दिन मैं लाऊंगा

तभी विश्वास से जनता है बैठी यार बरसों से

नहीं झुकना नहीं गिरना कसम तुमको है भारत की

हिमालय आज है मांगे दिया जो प्यार बरसों से

वही धोखा है फितरत में कि तौबाजिस से की…

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Added by munish tanha on April 23, 2016 at 10:30am — 3 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल
जख्म फिर से हरा हो गया
दर्द -ए -दिल आइना हो गया
याद ऐसा किया देख कर
सोच के बाबरा हो गया
काम के नाम ने चोट की
दिल बचा दिल जला हो गया
नींद का आँख से रूठना
रोज़ का सिलसिला हो गया
फीस में छूट थी जो मिली
लाडला फिर बड़ा हो गया
दाद दो तुम जरा इसलिए
गिर के वो खड़ा हो गया
खेल की पोल थी जब खुली
फिर मज़ा किरकिरा हो गया
मुनीष 'तन्हा'...नादौन..
9882892447

Added by munish tanha on April 21, 2016 at 3:50pm — 7 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल
जख्म फिर से हरा हो गया
दर्द -ए -दिल आइना हो गया
याद ऐसा किया देख कर
सोच के बाबरा हो गया
काम के नाम ने चोट की
दिल बचा दिल जला हो गया
नींद का आँख से रूठना
रोज़ का सिलसिला हो गया
फीस में छूट थी जो मिली
लाडला फिर बड़ा हो गया
दाद दो तुम जरा इसलिए
गिर के वो खड़ा हो गया
खेल की पोल थी जब खुली
फिर मज़ा किरकिरा हो गया
मुनीष 'तन्हा'...नादौन..
9882892447

Added by munish tanha on April 21, 2016 at 3:50pm — 1 Comment

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