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डॉ छोटेलाल सिंह's Blog – August 2018 Archive (2)

राखी

राखी

राखी धागा प्रेम का, कर लेना स्वीकार

केवल ये धागा नहीं,जनम जनम का प्यार ll

बहना तेरी खुश रहे,ऐसा करना काम

मान धर्म रखना सभी, होवे ना बदनाम ll

रिश्ता ये अनमोल है,समझो इसका मोल

पावन रिश्ते को कभी, पैसे से ना तोल ll

प्रेम झलकता एक दिन,फिर करते तकरार

दुख सहती बहना अगर, ये कैसा है प्यार ll

दिल से बहना को सभी, देना स्नेह दुलार

याद करे बहना कभी,मत करना इनकार…

Continue

Added by डॉ छोटेलाल सिंह on August 26, 2018 at 12:38pm — 10 Comments

आल्हा

आल्हा (वीर छन्द)

बरसे बादल उमड़ घुमड़ के,चहुँ दिशि गूँजे चीख पुकार

गाँव नगर सब डूब गया है,कुदरत की ऐसी है मार

विषम घड़ी आयी केरल में,बाढ़ मचाई है उत्पात

कांप उठा है कोना कोना, संकट से ना मिले निजात

भारी जन धन काल गाल में,कैसे सभी बचाएं जान

खेत सिवान झील में बदले,ध्वस्त हुए सारे अरमान

तहस नहस केरल की धरती,मची तबाही चारो ओर

नाव चले गलियों कूँचे में,काल क्रूर बन गया कठोर

जमींदोज सब भवन हो गए,आयी बाढ़ बड़ी…

Continue

Added by डॉ छोटेलाल सिंह on August 21, 2018 at 8:36pm — 14 Comments

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