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Atul kushwah's Blog – July 2014 Archive (3)

नहीं मालूम उसे बीमारी क्या है...

मेरे बदन में ये खुमारी क्या है
लो हम आ गए हैं तैयारी क्या है,

अच्छा खासा कारोबार मिट गया
दुकानदार से पूछो उधारी क्या है,

हम आपसे भी सलीके से निभा लेते
ये बताओ अपनी रिश्तेदारी क्या है,

तुम भी यार किससे सवाल करते हो
बेईमानों से पूछा है ईमानदारी क्या है,

वो रोज दवा लेने अस्पताल जाता है
नहीं मालूम उसे बीमारी क्या है।।
— मौलिक व अप्रकाशित
— अतुल

Added by atul kushwah on July 16, 2014 at 10:34pm — 8 Comments

उदास मां को एक बेटा हंसा के निकला है..

उदास मां को एक बेटा हंसा के निकला है

अंधेरे घर में वो दीपक जला के निकला है,

पानी गर्म था इसलिए ये खयाल आया,

इस समंदर से तो सूरज नहा के निकला है,

.

जमीं पर दिन के उजाले में उसको देखा था

रात में देखा तो चांद आसमां से निकला है,

वहां पर आज तक सोना कभी नहीं निकला

जहां खोदा गया पानी वहां से निकला है,

उनको देखा तो कायनात मुझसे पूछ उठी

अतुल इतना हसीं 'मौसम' कहां से निकला है।।

- मौलिक व…

Continue

Added by atul kushwah on July 7, 2014 at 6:30pm — 5 Comments

इस समंदर से कोई सूरज नहा के निकला है..

तुझे देखे अगर कोई जलन होती है सीने में,

सितम के सौ बरस गुजरें मोहब्बत के महीने में,

खुदाया क्या हुआ मुझको ये कैसा बावलापन है,

मैं खुद को जब भी देखूं तू दिखाई दे आईने में।।

----------------------------------

बेमतलब की बात बताने लगते हैं

खुद अपनी औक़ात बताने लगते हैं

नेता हैं वे राजनीति के मंचों से

सीने की भी नाप बताने लगते हैं।।

------------------------------------

अंधेरे घर में वो दीपक जला के निकला है

जिस्म की रूह से पसीना बहा के…

Continue

Added by atul kushwah on July 3, 2014 at 10:00pm — 3 Comments

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