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मोहब्बत के कलैंडर में कभी इतवार ना आए..

मुक्तक

फकत मेरे ​सिवा तुमको किसी पर प्यार ना आए,
मेरे गीतों में तेरे बिन कोई अशआर ना आए,
मिलन होता रहे तब तक कि जब तक चांद तारे हैं
मोहब्बत के कलैंडर में कभी इतवार ना आए।।

-------------------------------------------

तुम्हारे साथ जो गुजरे वो लम्हे हम नहीं भूले,
मिलन की वो घडी और फिर विरह के गम नहीं भूले,
ये बरसों बाद जाना है मोहब्बत का सबब मैंने,
तुम्हें भी हम नहीं भूले, हमें भी तुम नहीं भूले।।

-----------------------------------------

मैं जब भी प्रेम लिखता हूं वफाएं छूट जाती हैं
हसीं मौसम जो लिखता हूं फिजाएं रूठ जाती हैं,
तुम्हें बतला रहा हूं मैं स्वयं के दर्द का किस्सा
उन्हें आवाज देता हूं सदाएं टूट जाती हैं।।

--------------------------------------

जमाने में मोहब्बत के नशे में चूर हैं हम भी,
नाम बदनाम हो कितना मगर मशहूर हैं हम भी.
जमीं की याद में आंसू बहाते आसमां सुन लो,
जमीं से दूर गर तुम हो, किसी से दूर हैं हम भी।।

                                             

मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 23, 2014 at 1:37am

भाईजी, आपके मुक्तक पर मन प्रसन्न है. किन्तु, भाई शकील जमशेदपुरी के कहे पर आपको ध्यान देना था. शुभेच्छाएँ

Comment by atul kushwah on March 7, 2014 at 6:30pm

आदरणीय भाई सारथी जी, आपकी टिप्पणी पढकर बेहद प्रसन्नता हुई। आभार।  सादर—अतुल

Comment by atul kushwah on March 7, 2014 at 6:24pm

आ.डॉ.प्राची जी,उत्साह बढाने के लिए आभार। सादर

Comment by Saarthi Baidyanath on March 6, 2014 at 1:41pm

जिंदाबाद भाई अतुल जी ...मोहब्बत के कलैंडर में कभी इतवार ना आए।। लाजवाब ...उम्दा ! शानदार मुक्तक गढ़ा है ..वाह !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 6, 2014 at 12:27pm

प्रेम को गहनता से जीते हुए बहुत संवेदनशीलता के साथ लिखे गए इन सुन्दर मुक्तकों पर बहुत बहुत बधाई आ० अतुल कुशवाहा जी 

Comment by atul kushwah on March 2, 2014 at 10:06pm

आदरणीय भाई अलीन जी, आपको यह मुक्तक पसंद आया, बेहद खुशी हुई, कोशिश सार्थक। सादर—अतुल

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on March 2, 2014 at 8:29pm

जमाने में मोहब्बत के नशे में चूर हैं हम भी,
नाम बदनाम हो कितना मगर मशहूर हैं हम भी.
जमीं की याद में आंसू बहाते आसमां सुन लो,
जमीं से दूर गर तुम हो, किसी से दूर हैं हम भी।।.............बहुत खूब...............जवाब नहीं.............

Comment by atul kushwah on March 1, 2014 at 10:37pm

आदरणीया सरिता दीदी...आपको मुक्तक पसंद आए, बेहद प्रसन्नता हुई। सादर—अतुल

Comment by atul kushwah on March 1, 2014 at 10:35pm

आदरणीय गिरिराज सर, ठीक कहा आपने, मार्गदर्शन के लिए तहेदिल से आभार। सादर—अतुल

Comment by Sarita Bhatia on March 1, 2014 at 8:55pm

वाह अतुल भाई वाह खुबसूरत मुक्तक पढने में आनंद आया 

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