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Maharshi tripathi's Blog – June 2016 Archive (4)

वो इक बार दिल में हमें दाखिला दें

बहर- 122*4



सभी आज शरमों हया हम मिटा दें

हमें है मुहब्बत उन्हे हम बता दें





सजोंये सदाचार है जो अभी तक

अनोखा मेरा गाँव तुमको दिखा दें





नज़र लग न जाये बड़ी खूबसूरत

ये तस्वीर उनकी कहीँ हम छुपा दें





न हो दुश्मनी साथ मिलकर रहे हम

कोई फूल यारो हम ऐसा खिला दें





डिग्री साथ होगी हमारी विदाई

वो इक बार दिल में हमें दाखिला दें



यही आरजू है हमारी खुदा से

हमें हर जनम में उन्ही का बना… Continue

Added by maharshi tripathi on June 15, 2016 at 1:06pm — 14 Comments

दुरुपयोग

"हेलो,बहना क्या हाल है,ससुराल में सब ठीक है ना "

"क्या ठीक है भैया "

"अरे क्या हो गया,किसी नें कुछ कहा क्या ?

"अभी 2 सप्ताह ही हुए हैं आये और सभी खाना बनाने को कह रहे हैं "

"अच्छा,किसकी इतनी हिम्मत है,जो तुमसे खाना बनवायेगा "

"अरे,ये जो बुड्डी है ना वही,आप तो जानते हो भैया मुझे खाना बनाना......"

"रो,मत पगली,तू चिंता ना कर,ज्यादा बोलेंगे तो....तू जानती है ना "

"क्या भैया मैं समझी नही "

"अरे तू टेंशन ना ले,तेरा ये वकील भाई कब काम आयेगा .ज्यादा जुबान चलेगी… Continue

Added by maharshi tripathi on June 8, 2016 at 2:06pm — 9 Comments

अपने मित्रों को समर्पित एक गज़ल

बहर - 222 221 221 22

माला के मोती बिखर जा रहे हैं
सब एक एक कर अपने घर जा रहे हैं

कर आँखें नम छोड़कर यूँ अकेला
देकर इतनें गम किधर जा रहे हैं

ढूंढेगें फ़िर भी नही अब मिलेंगे
हमसा कोई भी जिधर जा रहे हैं

देखो पूरी हो गयी है पढ़ाई
ले बिस्तर वापस शहर जा रहे हैं

भगवन मेरे यार रखना सलामत
साथी मेरे जिस डगर जा रहे हैं

.
मौलिक व अप्रकाशित
(बी.टेक पूरा होने पर अपने मित्रों के जाने पर लिखी गज़ल )

Added by maharshi tripathi on June 3, 2016 at 11:30pm — 4 Comments

सदा ही ख्वाब में आऊ सदा जगाऊ मैं तुमको

बहर -1222 1222 1212 2222

सदा ही ख्वाब में आऊ सदा जगाऊ मैं तुमको

खुले जब आँख लूँ जब नाम पास पाऊ मैं तुमको

तेरी जब गोद में रखकर के सर गजल मैं पढता था

मेरा अरमान है इक बार फिर सुनाऊ मैं तुमको

गये जब से अकेला छोड़ हम तभी से रोते हैं

नहीं हसरत मेरी रोऊँ नहीं रुलाऊ मैं तुमको

भटकता दर-ब-दर हूँ फिर रहा कहाँ हो बोलो ना

सहा क्या क्या गवायाँ क्या मिलो गिनाऊ मैं तुमको

सहा जाता न अब हमसे विरह भरा मेरा जीवन

मेरी बाहें खुली आओ गले लगाऊ मैं…

Continue

Added by maharshi tripathi on June 1, 2016 at 11:10pm — No Comments

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