For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रक्षिता सिंह's Blog – June 2018 Archive (7)

जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)

जरा ज़ुल्फें हटाओ चाँद का दीदार मैं कर लूँ !

बस्ल की रात है तुमसे जरा सा प्यार मैं कर लूँ !!



बड़ी शोखी लिए बैठा हूँ यूँ तो अपने दामन में !

इजाजत हो अगरतो इनको हदके पार मैंकरलूँ!!



मुआलिज है तू दर्दे दिल का ये अग़यार कहते हैं!

हरीमे यार में खुद को जरा बीमार मैं कर लूँ !!



यूँ ही बैठे रहें इकदूजे के आगोश में शबभर !

जमाना देख ना पाये कोई दीवार मैं कर लूँ !!



तुझे लेकर के बाहों में लब-ए-शीरीं को मैं चूमूँ !

कि होके बेगरज़ अब इकनहीं…

Continue

Added by रक्षिता सिंह on June 28, 2018 at 3:16pm — 11 Comments

आप बीती...

इक आवारा तितली सी मैं

उड़ती फिरती थी सड़कों पे...



दौड़ा करती थी राहों पे

इक चंचल हिरनी के जैसे ...



इक कदम यहाँ इक कदम वहाँ

बेपरवाह घूमा करती थी...



कर उछल कूद ऊँचे वृक्षों के

पत्ते चूमा करती थी...



चलते चलते यूँ ही लब पर

जो गीत मधुर आ जाता था...



बदरंग हवाओं में जैसे

सुख का मंजर छा जाता था...



बीते पल की यादों से फिर

मैं मन ही मन भरमाती थी...



इठलाती थी बलखाती थी

लहराती फिर…

Continue

Added by रक्षिता सिंह on June 21, 2018 at 11:30pm — 16 Comments

बेबसी...

तपती धूप,

जर्जर शरीर,

फुटपाथ का किनारा,

बदन पर पसीना,

किसी के आने के इन्तजार में...

पथराई सी आँखें,

घुटनों पर मुँह रखे-

एक टक, एक ही दिशा में देख रही थीं...



- ना जाने कब से?



यूँ तो सामने दो छतरी पड़ी थीं, पर

कड़ी धूप में जल-जल के,

बदन काला पड़ गया था ....



रंग बिरंगे रूमाल -

सजे तो बहुत थे, पर

जिस्म पसीने में लथपथ था....



सफेद बाल,

तजुर्बों की गबाही दे रहे थे....

जिस्म पर लटकती खाल…

Continue

Added by रक्षिता सिंह on June 19, 2018 at 6:30am — 11 Comments

तुम्हारे स्पर्श से....

मैं संग चल दी उनके,

मेरा मन यहीं रह गया...

उन्होंने दिखाये होंगे हजारों ख्वाब,

पर इन आँखों में रौशनी कहाँ थी !!

कितने ही गीत सुनाये होंगे उन्होंने,

पर इन कानों के पट तो बंद हो चुके थे !!

उनके सबालों का,

जबाब भी ना दे पायी थी मैं....

क्योंकी इन होठों पे, तुम्हारा ही नाम रखा था!!

कितना आक्रोश था उनके ह्रदय में,

जब उन्होंने,

मेरे केशों को पकड़कर खींचा था...

और मैं पत्थर सी हो गयी थी,

किसी भी आघात की पीड़ा ना हुई…

Continue

Added by रक्षिता सिंह on June 15, 2018 at 5:12pm — 10 Comments

क्या वो लौटा सकता था ?

बड़े ही तैश में आकर'

उसने मेरे खत लौटा दिये...



वो अँगूठी !



वो अँगूठी भी उतार फेंकी-

जिसे आजीवन,

पास रखने का वादा किया था उसने!



कभी ईश्वर को साक्षी मानकर-

एक काला धागा,

पहनाया था उसने मुझे-



"अब तुम मेरी हो चुकी हो "

फिर ये कहकर,

बाहों मे भर लिया था...



आज,फर्श पर कुछ मोती-

औंधे पड़े हैं....

उस काले धागे के साथ !



एक तस्वीर थी जो,

साथ में -

आज उसे भी,

माँग बैठा था…

Continue

Added by रक्षिता सिंह on June 11, 2018 at 7:45am — 12 Comments

मुद्दतों बाद....

मुद्दतों बाद जब देखा उन्हें तो,

कुछ हुआ ऐसा-

जो रखने राज थे,

उनका भी हम इज़हार कर बैठे।।



तमाम उम्र से ज़ुल्मत भरी,

आँखों में थी लेकिन-

वो होकर रूबरू,

दीदा-ए-नम बेदार कर बैठे।।



अभी तक जो किया करते थे,

बस तक्ज़ीब उल्फत को-

पशेमाँ हो गये अब,

वो जो हमसे प्यार कर बैठे ।।



मुसलसल खुद हमें ताका किये,

वो शोख नज़रों से-

जो खोले लव,

फकत एक बोस पर तकरार बैठे ।।



बेसबब तोहबतें हम पर लगाकर,

हो गये…

Continue

Added by रक्षिता सिंह on June 7, 2018 at 2:18pm — 9 Comments

आ भी जा...

इन आँसुओं का कर्ज चुकाने आजा,

बिखरी हूँ मैं यूँ टूटकर उठाने आजा...



दिल से लगाके मुझको, यूँ न दूर कर तू

इक बार फिर तू मुझको सताने आजा....



अब लौट आ तू फिर से, इश्क की गली में

करके गया जो वादे निभाने आजा...



जो वेबजह है दर्मियाँ, उसको भुला दे

इक बार फिर से दिल को चुराने आजा...



सोती नहीं अब रात भर, तेरी फिकर में

इक चैन की तू नींद सुलाने आजा...



थमने लगीं साँसे मेरी, तेरे बिना अब

अरमान है तू दिल से लगाने…

Continue

Added by रक्षिता सिंह on June 6, 2018 at 12:39pm — 8 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
21 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
yesterday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service