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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – May 2019 Archive (1)

दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

दोहे



तरुवर  देते  फूल फल, नदिया  देती  नीर

मानव मानव को मगर देता नित क्यों पीर।१।



ओछा मन हद तोड़ता, ओछी नदिया कूल

जैसे चन्दन  से  अधिक, माथे चढ़ती धूल।२।



जो बोता  है  पेड़  इक, बाँटे सबको छाँव

काटे जो वट रात दिन, जलते उसके पाँव।३।



अर्थी, पूजा, प्रीत को, मिले न आगन फूल

इस युग बोने सब लगे, कैक्टस कैर बबूल।४।



मरने पर जिसको रही, गंगाजल की चाह

उसने  गंगा  ओर  की, हर  नाले की राह।५।



जहाँ पसीना…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 18, 2019 at 6:03pm — 8 Comments

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