For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sushil Sarna's Blog – May 2015 Archive (5)

गुलदस्ता - .......३ मुक्तक

गुलदस्ता - ........३ मुक्तक

हर लम्हा ....



जब भी  ये  दिल उदास होता है

जाने कौन  आस  पास  होता है

मेरी तन्हाई को  साँसे देने वाले

हर लम्हा तेरा अहसास होता है

..............................................

तमाम सांसें .....

आपकी हर अदा  को  सलाम करते हैं

अपनी मुहब्बत .आपके नाम करते हैं

वजह बन गए हैं जो हमारे ख़्वाबों की

तमाम सांसें .हम उनके नाम करते…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 25, 2015 at 1:30pm — 17 Comments

कितना सुहाना होगा ………..

कितना सुहाना होगा ………..



अपने अपने दंभों को समेटे

हम इक दूसरे की तरफ 

पीठ करके चल दिए 

बिना इसका अनुमान लगाये कि

मुंह मोड़ के हम

उन स्नेहिल पलों का 

अनजाने में क़त्ल कर रहे हैं 

जो हमने

तारों की छाँव में

चांदनी की बाहों में 

नशीली निगाहों में 

इक दूसरे के कन्धों पर सिर रख कर

इक दूसरे की उँगलियों में उंगलियाँ डालकर

इक दूसरे के केशों से खेलते हुए 

निशा में अपने अस्तित्व को 

इक दूसरे में विलीन करके संजोये थे 

और हाँ…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 20, 2015 at 2:17pm — 9 Comments

तृषा जीवन की …

न स्याम भई न श्वेत भयी …


न स्याम भई न श्वेत भयी
जब काया मिट के रेत भयी
लौ मिली जब ईश की लौ से
भौतिक आशा निस्तेज भयी
यूँ रंग बिरंगे सारे रिश्ते
जीवन में सौ बार मिले
मोल जीव ने तब समझा
जब सुख छाया निर्मूल भयी
सब थे साथी इस काया के
पर मन बृंदाबन सूना था
अंश मिला जब अपने अंश से
तब तृषा जीवन की तृप्त भयी

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on May 17, 2015 at 12:30pm — 16 Comments

प्यासी देह .....

प्यासी देह .....

मन की कंदराओं में किसने .......

अभिलाषाओं को स्वर दे डाले .......

किसकी सुधि ने रक्ताभ अधरों को ......

प्रणय कंपन के सुर दे डाले//

मधुर पलों का मुख मंडल पर ........

मधुर स्पंदन होने लगा .........

मधुर पलों के सुधीपाश में ........

मन चन्दन वन होने लगा//

नयन घटों के जल पर किसकी .......

स्मृति से हलचल होने लगी ........

भाव समर्पण का लेकर काया .......

मधु क्षणों में खोने लगी//

किसको…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 15, 2015 at 9:53am — 26 Comments

आँखों में बेबस मोती है …

आँखों में बेबस मोती है …

रात बहुत लम्बी है

ज़िंदगी बहुत छोटी है

पत्थरों के बिछोने पे

लोरियों की रोटी है

अब वास्ता ही नहीं

हाथों की लकीरों से

भूख बिलखती है पेट में

मुफलिसी साथ सोती है

आते ही मौसम चुनाव का

होठों पे हँसी होती है

राजनीति की जीत हमेशा

हम जैसों से ही होती है

हर चुनाव के भाषण में

नाम हमारा ही होता है

कुर्सी मिलते ही फिर से

फुटपाथ पे तकदीर होती है

संग होते हैं श्वान वही

वही भूखी रात…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 4, 2015 at 4:00pm — 14 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service