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Asha pandey ojha's Blog – May 2010 Archive (3)

इस देश का संबल बनो

नव पीढी तुम इस देश का संबल बनो

माहौल कीचड़ है तो क्या तुम कमल बनो

जो जलना चाहता है उसके लिए अंगार बनो

चैन-सुकूं जो चाहे उसके लिए जलधार बनो

चंड-प्रचंड ज्वाला कहीं, कहीं गंगाजल बनो

नव पीढी तुम .......

माहौल कीचड़ ........

वतन की खुशहाली तेरी आँखों का सपन हो

दिल में हो वतन परस्ती,सर पर कफ़न हो

हर क़दम हो दृढ़ता भरा,कभी न विचल बनो

नव पीढी तुम ......

माहौल कीचड़ ........

तोड़ दो उन हाथों को जो छीनते ग़रीब का निवाला

वतन से जो करते… Continue

Added by asha pandey ojha on May 13, 2010 at 11:46am — 13 Comments

माँ तुम

माँ तुम ममता का मूर्त रूप

तुम सतरंगी स्नेह -आँचल

तुम मंदिर प्रांगन सी पवित्र

तुम पावन -पुनीत गंगाजल

टेढ़ा -मेढ़ा विकट जीवन जगत

तुम सीधी-सादी सरल प्रांजल

छल ,छदम ,कपट चारों तरफ़

माँ तेरी गोदी निर्मल ,निश्छल

पावक ,अनल सामान जीवन

तुम चन्दन की छाया शीतल

तेरे आशीषों की ज्योत्सना से

पथ मेरा नित -नित उज्जवल

पाने तेरा वात्सल्य सोम -सुधा

ज़न्म-ज़न्म पी लूँ जीवन गरल

तेरी कोख पाने की अभिलाषा में

स्वयं -भू भी है आतुर प्रतिपल

मेरी… Continue

Added by asha pandey ojha on May 8, 2010 at 3:30pm — 16 Comments

ऐ खुदा इतना भी कमाल न कर

ऐ खुदा इतना भी कमाल न कर
ज़िंदगी में मौत सा हाल न कर
काँटों को इतनी तरज़ीह देकर
यूं फूलों का जीना मुहाल न कर
ये दुनिया इक मुसाफ़िर ख़ाना
इसमें बसने का ख़याल न कर
ग़मे दहर का झगड़ा लेकर
तूं अपने घर में बवाल न कर
दर्द का दरमाँ तड़फ ही है
करके मुहब्बत मलाल न कर
आग बहुत दुनिया में,पानी कम
ये आंसू बेवज़ह पैमाल न कर
याद कर वो माज़ी के मंज़र
तूं अपना बरबादे-हाल न कर
चांदनी की चाह में यूं न पगला
इन अंधेरों से विसाल न कर

Added by asha pandey ojha on May 4, 2010 at 1:30pm — 16 Comments

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