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Akhand Gahmari's Blog – April 2014 Archive (5)

फायदा क्‍या गजल

2122 2122 1222

क्‍या शिकायत करू मैं इस जमानें से

फायदा क्‍या है किसी को बतानें से

अब मजारो की तरफ यूँ न देखो तुम

आ सकेगें हम न आँसू बहानें से

बदनसीबी साथ मेरे उम्र भर थी

सो रहा हूँ चोट खा कर जमानें से

यार मेरे तुम बहाओ न अश्‍को को

फायदा क्‍या अब यहाँ दिल जलानें से

रूठ कर हम से चले ही गये वो जब

साथ ना अब तो मिले कुछ बतानें से

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी गहमर…

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Added by Akhand Gahmari on April 16, 2014 at 6:00pm — 16 Comments

आस के दीप गजल

212 212 212 212
गीत गा कर उसे हम सुनाते रहे
हाल दिल का उसे हम बताते रहे

रात भी तो गुजरने लगी थी मगर
पास आये न बाते बनाते रहे

प्‍यार उन से करे हम कहाँ बैठ जब
चाँद से भ्‍ाी उसे हम छुपाते रहे

प्‍यार हमने किया प्‍यार उसने किया
वो मिटाते रहे हम निभाते रहे

माँग उसकी सजाई लहू से मगर
साथ चल ना सके हम बुलाते रहे

फिर मिलेगे कभी ना कभी हम यहाँ
आस के दीप मन में जलाते रहे

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on April 15, 2014 at 12:30pm — 10 Comments

साथ उनका मिला

चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये

साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये



बीत गये हमारे पल इंतजार के

बंध गये थे हम धागो में प्‍यार के

जिन्‍दगी में चाहत के फूल खिल गये

साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये

चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये



हर चाहतो को मेरी जानने लगे

आँखो की भाषा को पहचाने लगे

जीवन के रंग ढ़ग सभी बदल गये

साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये

चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये



इक दिन जाने कैसा आया जलजला

टूट गया उसके आने का…

Continue

Added by Akhand Gahmari on April 9, 2014 at 5:30pm — 10 Comments

खुश रहना

 5 हायकु

उदास हम

हो गये हैं फिर से

छले जो गये

मिले वो हमें

जिन्दगी बन कर…

Continue

Added by Akhand Gahmari on April 4, 2014 at 7:13pm — 6 Comments

दामन के दाग गजल

बात भी दिल की तुझे हम अब बतायें कैसे

साथ जो हमने बिताये पल भुलायें कैसे

बंद रखना तू न ओठों को बता दे इतना

बात जो दिल पर लिखी तुमने मिटायें कैसे

मौत भी करती रही है वेवफाई मुझसे

पास हम अपने बुलायें तो बुलायें कैसे

आपकी तो चाहतो में खुद जले थे ऐसे

लाश भी कोई हमारी अब जलायें कैसे

खोल कर अपने लबों को तू बता दे यारा

दाग दामन पर लगे हैं वो धुलायें कैसे

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on April 3, 2014 at 5:17pm — 12 Comments

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