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शिज्जु "शकूर"'s Blog – April 2015 Archive (6)

बहरे वाफर में मेरी पहली कोशिश

मुफाइलतुन मुफाइलतुन मुफाइलतुन

 

हयात मेरी न लज़्ज़ते कायनात मेरी

सहर को है वक्त और सियाह रात मेरी

 

निचोड़ के खून तक मेरे जिस्म से वो कहें

कि बख़्श दी जान देखिये इल्तिफ़ात* मेरी                    *कृपा

 

न दोस्त न दिलनवाज़* रहा कोई मेरा अब                  *दिल को तसल्ली देनेवाला

ख़ुदा से ही कहता हूँ मैं हर एक बात मेरी

 

उतरने लगेंगे खोल वफ़ा के अब पसे मर्ग                     *मौत के…

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Added by शिज्जु "शकूर" on April 26, 2015 at 9:00am — 14 Comments

अब और सब्र का तू मेरे इम्तिहाँ न ले

221 2121 1221 212

अब और सब्र का तू मेरे इम्तिहाँ न ले

मेरी ज़मीं न छीन मेरा आसमाँ न ले

 

है मुख़्तसर ज़मीन तमन्नाओं की फ़क़त

ऐ बेरहम नसीब यूँ मेरा जहाँ न ले

 

कम रख ज़रा तू अपनी रवानी को ऐ हवा

इतना रहम तो कर कि मेरा आशियाँ न ले

 

जज़्बात से न बाँध मुझे ऐसे हमनशीं

मत रोक लफ़्ज़ मेरे यूँ मेरी ज़बाँ न ले

 

कायम है कायनात शजर के वुजूद से

खुद को ही बेवुजूद न कर अपनी जाँ न ले

 

 मौलिक व…

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Added by शिज्जु "शकूर" on April 21, 2015 at 6:10pm — 17 Comments

बह गये तूफान में वो जा किनारे से लगे- ग़ज़ल

2122/ 2122/ 2122/ 212

बह गये तूफान में वो जा किनारे से लगे

लड़ने वाले ही मगर सब बेसहारे से लगे

 

हार के बाहर हुये वो चैन की अब साँस लें

जीतने की जो कहें मुझको वो हारे से लगे

 

बारहा मेरे करीब आकर ठहर जाते हैं यूँ

ये हवादिस मेरी किस्मत के इशारे से लगे

 

लुट गया सामां सफर में हर मुसाफिर का यहाँ

लोग भी बेआस बेबस गम के मारे से लगे

 

कागज़ों पर है नुमायाँ हाले दिल मेरा “शकूर”

राख से कुछ हर्फ़ कुछ…

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Added by शिज्जु "शकूर" on April 12, 2015 at 10:16pm — 30 Comments

हाँ ये खबर जफ़ा की, बनाई हुई तो है - ग़ज़ल

221 2121 1221 212

लोगों के दरमियान उड़ाई हुई तो है

हाँ ये खबर जफ़ा की, बनाई हुई तो है

 

हों तेरे दिल में रश्क़ो हसद तो हुआ करे

आखिर ये आग तेरी लगाई हुई तो है

 

सच ही कहा ये आपने आज़ार देखकर

इक चोट मेरे दिल ने भी खाई हुई तो है

 

गलियों में ये पड़े हुए खाशाक* देखिये                *कूड़ा करकट

इस शह्र में कहीं पे सफाई हुई तो है

 

चटखी हैं उँगलियाँ वो भुजायें फड़क गईं

शामत किसी की “आप” में आई हुई तो…

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Added by शिज्जु "शकूर" on April 7, 2015 at 12:11pm — 28 Comments

उठने लगा है दिल से मेरे ये सवाल क्यों- ग़ज़ल

221 2121 1221 212

उठने लगा है दिल से मेरे ये सवाल क्यों

इस तंगदिल जहाँ से करूँ अर्ज़े हाल क्यों

 

तुझसे रही न कोई शनासाई ऐ हयात

फिर बार-बार आये तेरा ही खयाल क्यों

 

हैं अश्क़बार और भी इस बज़्म में कई

ऐ दोस्त ये बता कि मेरी ही मिसाल क्यों

 

आयेंगे और लम्हे अभी तो बहार के

आखिर तुम्हें है शाखे शजर ये मलाल क्यों

 

कैसे बताये कोई मुकद्दर किसी का क्या

कल जो खिला चमन में वो अब पायमाल…

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Added by शिज्जु "शकूर" on April 4, 2015 at 2:53pm — 34 Comments

शह्र छोड़ गई-ग़ज़ल

1212 1122 1212 112/22

गई तो रंग बदलता ये शह्र छोड़ गई

घटा बहारों में ढलता ये शह्र छोड़ गई

 

सबा चमन से गुज़रते हुये महक लेकर

रविश-रविश* यूँ टहलता ये शह्र छोड़ गई                                    *बाग़ के बीच की पगडण्डी          

 

फ़िज़ा ए शह्र तलक आके यक-ब-यक आँधी

यूँ मस्तियों में उछलता ये शह्र छोड़ गई

 

तमाम रात भटकती वो तीरगी* आखिर                                        *अँधेरा

पिघलती शम्अ पिघलता…

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Added by शिज्जु "शकूर" on April 1, 2015 at 5:30pm — 20 Comments

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