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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – March 2022 Archive (7)

आभार - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" (दोहे)

मात -पिता ने जन्म दे, पाला, किया दुलार।

प्रथम करें हम इसलिए, उनका ही आभार।।

*

गुरुओं ने जो  ज्ञान दे, जीवन दिया सँवार।

चाहे जितना भी करें, कम पड़ता आभार।।

*

सखा, सहेली, मीत जो, सुख दुख में तैयार।

उनका भी तो हम करें, नित थोड़ा आभार।।

**

आस - पड़ौसी जो करें, प्रेम भरा व्यवहार।

हक से उनका भी करें, चलो आज आभार।।

*

सदा चिकित्सक दे दवा, करते हैं उपचार।

जीवन रक्षण के लिए, उनका भी आभार।।

*

अन्य सभी जो  भी  हुए, जीवन  में…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 21, 2022 at 10:00pm — 4 Comments

वानिकी के दोहे

सदा कीजिए वानिकी, मिलती इससे छाँव।

नगर प्रदूषण से  रहित, प्यारा  लगता गाँव।।

*

जन जीवन है पेड़ से, नहीं पेड़ को काट।

पेड़ बिना है यह  धरा, बस  रेतीला घाट।।

*

अपने दम पर वानिकी, जीवित रखे पहाड़।

बची नहीं  जो  वानिकी, धरती  बने उजाड़।।

*

इन से ही सुन्दर लगे, इस धरती का रूप।

पेड़ बहुत हैं  काम  के, हरते  तपती धूप।।

*

वन सिखलाते हैं सदा, जीवन की हर रीत।

पुरखों ने सच ही कहा, इनको अपना मीत।।

*

पर्वत पथ तट जो रहे, लम्बी…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 20, 2022 at 10:00pm — 3 Comments

होली  की  हर रीत (दोह) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

अहंकार की हार हो, जीते नित्य विनीत।

इतना ही  संदेश  दे, होली  की  हर रीत।१।

*

दहन होलिका का करो, होली के त्योहार।

तजकर ही होली मने, पाखण्डी व्यवहार।२।

*

रंग अनोखे  थाल  भर, हर  घर गाती फाग।

होली कहती मिल गले, भेद भाव को त्याग।३।

*

कहकर बाँटें रंग ढब, मत रख खाली हाथ।

निखरा लाल पलास तो, सेमल आया साथ।४।

*

होली सब को पर्व हो, चाहे बिलकुल एक।

मन में उठी उमंग  जो, उस के अर्थ अनेक।५।

*

चाहे सूखी खेलना, या फिर पानी डाल।

पर्व…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 16, 2022 at 10:27pm — 2 Comments

अनोखे रंग - दोहे

फैला आँचल है बहुत, लेकिन चोली तंग।

धरा  देश  की  देखिए, लिए  अनोखे रंग।।

*

भरें अनोखे रंग नित, जीवन में त्योहार।

तभी सनातन धर्म में, है इनकी भरमार।।

*

बहना, माता, सहचरी, बंधु , तात आधार।

भरे अनोखे रंग नित, मीत रूप में प्यार।।

*

बचपन यौवन वृद्धता, चलते संग कुसंग।

नित  जीवन  देता  रहा, हमें  अनोखे रंग।।

*

बड़े अनोखे  रंग  यूँ, रखती धरती पास।

पानी पानी है कहीं, कहीं सिर्फ है प्यास।।

*

विविध अनोखे रंग की, मौसम मौसम धार।

धरती…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 13, 2022 at 11:54pm — 4 Comments

नवयुग की नारी (गीत)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

यह नवयुग की नारी है, सुमन रूप चिंगारी है।।

अबला औ' नादान नहीं अब।

दबी हुई पहचान नहीं अब।।

खुली डायरी का पन्ना है,

बन्द पड़ा दीवान नहीं अब।।

अंतस स्वाभिमान भरा है, लिए नहीं लाचारी है।।

यह नवयुग की नारी है.....

संघर्षों में तप कर निखरी।

पैमानों पर चोखी उतरी।।*

जितना इसको गया दबाया,

उतना बढ़चढ़ यह तो उभरी।।*

हल्के में मत इस को लो, छिपी हुई दोधारी है।।

यह नवयुग की नारी है.....

इसका साहस जब नभ गाता।

करता…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 7, 2022 at 8:54pm — 8 Comments

युद्ध के दोहे- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

देगा हल क्या ये भला, स्वयं समस्या युद्ध

दम्भी इस को ओढ़ता, तजता सदा प्रबुद्ध।१।

*

युद्ध न लाता भोर है, यह दे केवल साँझ

इस के हर परिणाम से, होती धरती बाँझ।२।

*

सज्जन टाले युद्ध को, दुर्जन दे सत्कार

जो झेले वह जानता, कैसी इसकी मार।३।

*

लोग समझते शांति की, यह रचता बुनियाद

लेकिन बचती राख ही, सदा युद्ध के बाद।४।

*

इससे बढ़ता नित्य ही, दुख का पारावार

जाने अन्तिम युद्ध कब, होगा इस संसार।५।

*

सदा प्रगति शान्ति का, युद्ध बना अवरोध

लेकिन…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 3, 2022 at 2:36pm — No Comments

शिवमय दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

भीम, महेश्वर,  शम्भवे,  शंकर,  भोलेनाथ

गंगाधर, श्रीकण्ठ का, सबके सिर पर हाथ।१।

*

गिरिश, कपाली, शर्व ही, शिवाप्रिय, त्रिलोकेश

कृत्तिवासा, शितिकण्ठ का, हिममय है परिवेश।२।

*

वो सर्वज्ञ, परमात्मा, अनीश्वर, त्रयीमूर्ति

हवि,यज्ञमय, सोम हैं, करते इच्छा पूर्ति।३।

*

शूलपाणी , खटवांगी , विष्णुवल्लभ, शिपिविष्ट

भक्तवत्सल,  वृषांक  उग्र,  करते  हरण अनिष्ट।४।

*

तारक,  परमेश्वर,  अनघ,  हिरण्यरेता,  गणनाथ

शशि को धर शशिधर हुए,…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 1, 2022 at 12:26am — No Comments

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