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शिज्जु "शकूर"'s Blog – March 2015 Archive (4)

हैरत नहीं अगर कोई नाकाम हो गया- ग़ज़ल

221 2121 1221 212

जो होना था फ़रेब का अंजाम हो गया

इक मुह्तरम जहान में बदनाम हो गया

 

आफ़ाक़ के सफर में नहीं मिलती मंज़िलें

हैरत नहीं अगर कोई नाकाम हो गया

 

जलने लगे चराग सितारे चमक उठे

दीदारे ताबे हुस्न सरे शाम हो गया

 

बेदार शब तमाम जला चाँद अर्श पर

जाहिर जुनूने इश्क़ सरे बाम हो गया

 

तेरी मुहब्बतों से मुनव्वर किया दयार

आलम फ़रोज़ शम्स को आराम हो गया

 

मौलिक व अप्रकाशित

Added by शिज्जु "शकूर" on March 29, 2015 at 8:30am — 13 Comments

ये समझना तू बेनज़ीर हुआ

2122 1212 112/22

जब ज़माना मेरा मुशीर हुआ

लोग हाकिम तो मैं असीर हुआ

 

तुझपे पत्थर अगर बरसने लगे

ये समझना तू बेनज़ीर हुआ

 

जा ब जा बेख़याल फिरता हूँ

ये खबर है कि मैं फकीर हुआ

 

बेखबर दिल निगाहे क़ातिल तेज़

सो निशाने पर अब के तीर हुआ

 

तंग हाली ज़बाँ से झाँके है

कौन कहता है वो अमीर हुआ

(मुशीर-सलाहकार,  असीर-कैदी, बेनज़ीर-लाजवाब)

 

-मौलिक व अप्रकाशित

Added by शिज्जु "शकूर" on March 18, 2015 at 3:32pm — 26 Comments

ग़ज़ल

2122- 2122- 212

ख़्वाब से डरने लगा हूँ इन दिनों

नींद से मैं भागता हूँ इन दिनों

 

धड़कनें हैं तेज़ राहें पुरख़तर

मैं सँभलकर चल रहा हूँ इन दिनों

 

वुसअते शब बेबसी तन्हाइयाँ

इन अज़ाबों से घिरा हूँ इन दिनों

 

मुझपे भारी है हर इक लम्हा बहुत

फिक्र की तह में दबा हूँ इन दिनों

 

आइना हटकर परे मुझसे कहे

पत्थरों सा हो गया हूँ इन दिनों

 

कोई बतलाये मुझे मैं कौन हूँ

पहले क्या था और क्या…

Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on March 12, 2015 at 9:54am — 21 Comments

गज़ल

1212 1122 1212 112/22



दबी हर आह तेरा इश्क़ भी दबा ही सही

जुदा है तेरा ये अंदाज़ तो जुदा ही सही



मेरी ग़ज़ल में उतर आती है वो आहिस्ता

मेरा हयात से बस इतना वास्ता ही सही



ग़ज़ल में डूब के खुद को भुला दिया हमने

चलो कुछ और नहीं तो यही नशा ही सही



खयाल तेरी तमन्ना का है मेरे दिल में

सो रहनुमाई को अब तेरा मशविरा ही सही



हर एक शय में मुहब्बत के किस्से बिखरे हैं

महल नहीं न सही एक मक़बरा ही सही



मेरा खयाले मसर्रत में… Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on March 1, 2015 at 4:52pm — 22 Comments

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