For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dr. Vijai Shanker's Blog – January 2015 Archive (7)

सरकार - इनकी उनकी--- डॉo विजय शंकर

लोगों की , लोगों से , लोगों के लिए
सरकार होती है ,
हमने इनकी , उनकी ,
हर इनकी , हर उनकी ,
सरकार बना दी , लोगों से छीन कर ।
हालात ये हैं कि अब हर एक
ठगा सा लगता है,
दूसरे की हो सरकार तो
डरा डरा सा लगता है ॥
खुद अपनी हो सरकार तो
ज्यादा ही अड़ा अड़ा सा लगता है ॥
अपनी स्वतंत्रता , अपना राज , अपनी सरकार ,
सब कुछ अपना अपना है , दूजे सब बेकार ॥

मौलिक एवं अप्रकाशित
डॉo विजय शंकर

Added by Dr. Vijai Shanker on January 29, 2015 at 10:29am — 30 Comments

जनतंत्र पूर्ण हो जाएगा --- डॉ o विजय शंकर

ये हुकूमतें , ये शान,

ये ऐशो -आराम ,

किस से हैं , किस की बदौलत हैं ,

जिस दिन ये यह अहसास हो जाएगा ,

उस दिन जनतंत्र भी पूर्ण हो जाएगा ॥



बत्तीस रूपये प्रतिदिन में

जिंदगी गुजारने वाले,

किसके बनाये हुए हैं ,

इनकी सोच , इन्होंने ही

एक एक वोट जोड़कर ,

तुझ जैसों को राजा बनाया है ||



महल की ऊपरी आखिरी ईंट तक

बुनियाद की शुक्रगुजार होती है ,

ख्याल कर ,

ये कब से तुझको

इतना ऊंचा उठाये हैं अपने सिर पर ,

इनका तो ख्याल… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on January 26, 2015 at 11:10am — 19 Comments

कितनी अपनी है जिंदगी --- डॉ o विजय शंकर

अपनी होते हुए भी कितनी अपनी है जिंदगी ,

हम नाचते हैं जिंदगी भर , नचाती है जिंदगी।



बस में बिलकुल नहीं है किसी के भी जिंदगी

खुद पर जिंदगी भर कितनी हावी है जिंदगी।



हसरत है तुझे जी लें एक बार अपने ही ढंग से

पर तू तो अपने ही ढंग से जिलाती है जिंदगी।



वो नाचने वाला है ,हुनर है , यही रोजी है उसकी ,

उसको भी अपने ही ढंग से नचाती है जिन्दंगी |



उसकी मर्जी ,करम कैसे - कैसे कराती है जिंदगी

निष्ठुर अपने ही ढंग से हँसाती-रुलाती है जिंदगी… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on January 23, 2015 at 10:42am — 15 Comments

जन भ्रमित है , मन भ्रमित है -- डॉ o विजय शंकर

जन भ्रमित है ,

मन भ्रमित है ,

जन-इच्छा , बनी नहीं ,

जन-शक्ति , जगी नहीं ,

जनतंत्र है , तंत्र को

जन की ही खबर नहीं ,

कोई फ़िकर नहीं |

तंत्र जन जन से दूर है ,

जन तंत्र से मजबूर है ,

विवश है, लाचार है,

डरा ,सहमा , बीमार है,

कुछ कह नहीं पाता ,

जनादेश देने वाला,

आदेश , किसी को ,

दे नहीं पाता ,

तंत्र व्यस्त है , स्वयं में मस्त है ,

जन उपेक्षित है , हालात से त्रस्त है ,

तंत्र क्या क्या पा रहा है,

जन क्या क्या खो… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on January 20, 2015 at 9:07am — 23 Comments

अच्छे दिन व्यापार हुआ करते हैं-- डॉ o विजय शंकर

दुआओं में याद कीजियेगा ,

जब याद कीजियेगा ,

दुआ कीजियेगा।

मिलते हैं तो कहते हैं ,

आपकी सुबह अच्छी हो ,

शाम अच्छी हो ,

रात अच्छी हो,

जितनी बार मिलते हैं , हर बार कहते हैं ।

दिन रहते , विदा होते हैं , तो

आपका दिन अच्छा हो , कहते हैं ।

दुआओं में असर होता है ,

लोग यूँ भी दुआ करते हैं ,

हाथ मिला कर कहते हैं,

सिर को थोड़ा झुका कर कहते हैं ,

मुस्कुरा कर कहते हैं ,

जिसे जानते हैं , उस से कहते हैं ,

नहीं जानते , उस से भी…

Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on January 18, 2015 at 11:30am — 14 Comments

जीवन, रेखा पार -- डॉo विजय शंकर

गरीब होता नहीं है ,

गरीब घोषित होता है ।

वैसे ही जैसे सूखा घोषित होता है,

जैसे बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र घोषित होता है ।

गरीबी की एक रेखा होती है ,

होती वो गरीबी अमीरी के बीच की है ,

सम्मान वश उसे गरीबी की रेखा कहते हैं ,

आदमी जितना इस रेखा को जानता है ,

उतना विषुवत रेखा को नहीं जानता है ।

उसको लांघ गए तो वाह,

गरीब घोषित होने के चांस बन गए ।

होना न होना तो अलग ,

हो भी गए तो क्या पा जाओगे ,

नहीं होगे तो क्या है, जो खो दोगे ।

हाँ, एक… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on January 8, 2015 at 2:00pm — 10 Comments

गरीबी - एक विषय : डॉo विजय शंकर

कवि थे ,

गरीबी बहुत है ,

अच्छे वाक-जाल में

बयान की , कविता अच्छी बनी ,

मित्रों ने चाय-वाय की फरमाइश की ,

खूब वाह-वाही मिली ,

चाय-वाय रात भर चली ||



लेखक थे ,

गरीबी पर लेख छपा था ,

दिन भर बधाईयाँ आती रहीं ,

बहुत खुश थे , आग्रह भी था ,

ख़ास मित्रों ,पत्नी और बच्चों को ,

मंहगे रेस्त्रां में डिनर पर ले गए ,

गरीबी पर डिस्कशन खूब हुआ ,

खाना - पीना देर रात तक हुआ ,

देर हो ही गयी , रात देर से लौटना हुआ ॥



फ्री… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on January 2, 2015 at 8:23pm — 20 Comments

Monthly Archives

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service