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santosh khirwadkar
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"हृदय से आभार आ. नीलम जी "
Jul 3
Neelam Upadhyaya commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"आदरणीय संतोष जी, बहुत ही सुन्दर गजल के लिए मुबारकबाद स्वीकार करें । "
Jul 2
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"शुक्रिया आ. राज जी "
Jul 1
राज़ नवादवी commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"बहुत खूब जनाब संतोष जी. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें.  मैं बहुत उलझा हुआ था ज़िन्दगी के फेर में तूने मेरी जान लेकर मसअला हल कर दिया क्या कहने, वाह…"
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"धन्यवाद आ.तेजवीर साहब "
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"नमस्कार गुरप्रीत जी, आप का तहेदिल से शुक्रिया"
Jul 1
TEJ VEER SINGH commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"हार्दिक बधाई आदरणीय संतोष जी। लाज़वाब गज़ल। मैं बहुत उलझा हुआ था ज़िन्दगी के फेर में तूने मेरी जान लेकर मसअला हल कर दिया"
Jul 1
Gurpreet Singh commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"जनाब संतोष जी ..नमस्कार ..आज आपकी ये ग़ज़ल पढ़ी ...ग़ज़ल बेहद पसंद आई ..बहुत ही शानदार अशआर कहे हैं आपने सभी के सभी ..इस ग़ज़ल के लिए आपको बहुत बहुत बधाई "
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"हृदय से आभार आ. गुमनाम जी .."
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"सलाम आ.आरिफ़ साहब...तहेदिल से शुक्रिया"
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"घन्यवाद आ.बृजेश जी ...."
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"आभार आ.श्याम जी .."
Jul 1
gumnaam pithoragarhi commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
Jul 1
Mohammed Arif commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"आदरणीय संतोष जी आदाब,                     बहुत ही बेहतरीन इश्क़ के रंग में डूबी ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Jun 30
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"वाह बड़ी अच्छी ग़ज़ल कही है..."
Jun 30
Shyam Narain Verma commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"बहुत बहुत बधाई आपको इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए सादर ।"
Jun 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal
Native Place
Indore
Profession
Govt service
About me
National table-tennis player/coach

Santosh khirwadkar's Blog

उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन

उसने बिखरे काग़ज़ों को छू के संदल कर दिया

इक अधूरी सी ग़ज़ल को यूँ मुकम्मल कर दिया

कुछ तो दीवाना…

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Posted on June 30, 2018 at 8:30am — 18 Comments

क्या सबब था...संतोष

अरकान फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

क्या सबब था,किसलिये दुनिया से मैं डरता रहा

सर झुका कर जिसने जो भी कह दिया करता रहा



सी दिया था मेरे होटों को ज़माने ने मगर

ज़िक्र सुब्ह-ओ-शाम तेरा फिर भी मैं करता रहा



ज़िन्दगी के रास्ते में ज़ख़्म जो मुझको मिले

चुपके चुपके प्यार के मरहम से वो भरता रहा



जाते जाते वो मुझे कह कर गये थे इसलिये

लम्हा लम्हा ज़िन्दगी जीता रहा मरता रहा



सादगी की मैंने ये क़ीमत चुकाई उम्र…

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Posted on June 3, 2018 at 4:34pm — 12 Comments

यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!

अरकान:-

मफ़ऊल फ़ाईलात मफ़ाईल फ़ाइलुन



यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया,

इंसा जिसे बनाया था हैवान हो गया।।



भेजा था इसको अम्न की ख़ातिर जहान में,

कैसे ख़िलाफ़ अम्न के इंसान हो गया।।



शैतान का भी शर्म से देखो झुका है सर,

इंसान ख़ुद ही आज तो शैतान हो गया।।



चिंता में बेटियों की हर इक बाप है यहाँ,

अब क्या बताऊँ मैं तो परेशान हो गया।।



ढाये यहाँ पे गंदी सियासत ने वो सितम,

लगता है जैसे मौत का सामान हो गया।।…

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Posted on May 11, 2018 at 8:30pm — 6 Comments

गुज़रे वक़्तों की वो तहरीर.....संतोष

अरकान:-

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन

गुज़रे वक़्तों की वो तहरीर सँभाले हुए हैं,

दिल को बहलाने की तदबीर सँभाले हुए हैं।।

बाँध रक्खा है हमें जिसने अभी तक जानाँ,

हम महब्बत की वो ज़ंजीर सँभाले हुए हैं।।

देखते रहते हैं अजदाद के चहरे जिसमें,

हम वफ़ाओं की वो तस्वीर सँभाले हुए हैं।।

जिन लकीरों में नजूमी ने कहा था,तू है,

दोनों हाथों में वो तक़दीर सँभाले हुए हैं।।

वस्ल की शब…

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Posted on April 17, 2018 at 11:21am — 16 Comments

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