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Tanweer
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"acchi ghazal hai. bahut mubarak"
Oct 26, 2019
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"nadir sb. bahut mubarakbaad.poori taraash kharaash ke saath saaf suthri ghazak kahi hai. wah."
Oct 25, 2019
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"wah. bahut mubarak"
Oct 25, 2019
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"मेरे वजूद से उसे इन्कार भी नहीकैसी है ये अदा कभी इज़हार भी नही हैं मरहले ये इश्क़ के, उनके ख़याल मेंआता हूँ बार बार के बेज़ार भी नही क्या मुझ को ले के जाएगा उस पार है पता ?मझधार में है कश्ती के पतवार भी नही है यह अजीब बात मगर देखिए के सचआज़ाद भी नही…"
Oct 25, 2019
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"जनाब क़मर जौनपुरी साहब बेहतरीन पेशकश  के लिए ढेरों मुबारकबाद आपको .... "
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"ये होना जैसे शबनम के फना होने से पहले था मेरा खोया हुआ सब कुछ तेरा होने से पहले था   किसी के ज़ेहन में गोते लगाता था यूँ ही बरबस नया हर सच किताबों में लिखा होने से पहले था   हर इक लम्हा बदलता है तवाजुन जिस को कहते हैं मेरा क्या था जो मुझ से…"
Sep 28, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur
Native Place
Bilaspur
Profession
Govt. Employee

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At 5:24pm on May 17, 2025, Erica said…

I need to have a word privately,Could you please get back to me on ( mrs.ericaw1@gmail.com)Thanks.

Tanweer's Blog

तरही ग़ज़ल (मुझको ये भी न था मालूम किधर जाना था)

अपने ही छाँव तले मुझ को गुज़र जाना था 

आग फैली थी हर इक सिम्त मगर जाना था 

 

कितनी रानाइयाँ सज धज थी तेरी महफ़िल में 

बेसरापा मुझे अनजान शहर जाना था

 

है नई रस्म यहाँ हाकिम ए दौरां की यूँ 

नातवां हो के तेरे दर से गुज़र जाना था 

 

राज़ क्या क्या थे निहाँ वक़्त के साये में मगर

छेड़ कर तान वही फिर से बिखर जाना था 

 

बैठ कर शीश महल से जो न देखा तुमने

आग का गोला था जिस को के शरर जाना था 

 

हाल अपना…

Continue

Posted on February 26, 2019 at 6:52pm — 8 Comments

 
 
 

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