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"मुहतरमा राजेश कुमारी साहिबा आपकी नवाजिशों का पुर खुलूस शुक्रिया"
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Laxman Prasad Ladiwala commented on IMRAN KHAN's blog post हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती...
"उम्दा गजल बेहतरीन भाव अभिव्यक्ति बधाई इमरान खान भाई हमारा' दिल है' के' काबू में' आ नहीं पाता,                                                                                                          …"
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ajay sharma commented on IMRAN KHAN's blog post हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती...
"तमाम उम्र ये' अब बात हो नहीं सकती,हमारी' फिर से' मुलाकात हो नहीं सकती।    KYA SHER HAI JANAB ,,,,हर एक ख्वाब की' ताबीर मिल सके हमको,कोई भी' ऐसी' करामात हो नहीं सकती।    SACH KAH DIYAछुपा के'…"
Dec 3, 2012
Chandresh Kumar Chhatlani commented on IMRAN KHAN's blog post हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती...
"बहुत खूब खान साहब, आपकी इस ग़ज़ल को पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा| इतनी सुन्दर रचना के लिए बहुत बधाई |"
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rajesh kumari commented on IMRAN KHAN's blog post हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती...
"मैं' रात हूँ मुझे' सूरज मिले भला कैसे,हो' शम्स पास तो' फिर रात हो नहीं सकती। छुपा के' रक्खूँ' ये' रिश्ता यूँ' ही ज़माने से,के' हमसे' इतनी' एहतियात हो नहीं सकती।---पूरी ग़ज़ल शानदार है एक एक शेर पर…"
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IMRAN KHAN commented on IMRAN KHAN's blog post हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती...
"गुरूब - अस्त शम्स - सूरज इल्तजात - प्रार्थानायें कबीर - बड़ा मुनाजात - रात के अंधेरे में खुदा के सामने गुनाह कबूलकर माफी माँगना हयात - जीवन तल्खी' ए हालात - वर्तमान कठिनाइयाँ"
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"रविकर जी गजल पसंद करने का शुक्रिया शब्दों के अर्थ मैं टिप्पणी के रूप में डाल दूँगा"
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IMRAN KHAN commented on IMRAN KHAN's blog post हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती...
"अरुन शर्मा साहब बहुत शुक्रिया आपका"
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हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती...

Posted on December 2, 2012 at 10:30pm 19 Comments

तमाम उम्र ये' अब बात हो नहीं सकती,

हमारी' फिर से' मुलाकात हो नहीं सकती।



हर एक ख्वाब की' ताबीर मिल सके हमको,

कोई भी' ऐसी' करामात हो नहीं सकती।



गुरूब हो चुका' मेरे नसीब का सूरज,

अब और नूर की' बरसात हो नहीं सकती।



मैं' रात हूँ मुझे' सूरज मिले भला कैसे,

हो' शम्स पास तो' फिर रात हो नहीं सकती।



बजाय हमको' मनाने के' कह गये वो तो,

के' हमसे' कोई' इल्तजात हो नहीं सकती।



को'ई गुनाह बहुत ही कबीर है मेरा,

कबूल जिसकी' मुनाजात… Continue

दर्दे तन्हाई

Posted on November 20, 2012 at 11:53pm 9 Comments

मैं जहाँ भी रहूँ,

तू भी' आती है' क्यूँ।



मैं अकेला कहाँ,

तेरी' यादों में' हूँ।



ठोकरें भी लगें,

तो भी' चलता रहूँ।



मेरी बर्बादियाँ,

चल रही दू ब दूँ।



कत्ले' अरमाँ या' जाँ,

बोल दे क्या' करूँ।



जिस्म ठंडा हुआ,

रूह जलती है' क्यूँ।



फिर ते'री याद में,

दीद में खूँ ही' खूँ।



ज़ख़्मी' सारा जिगर,

दर्द कैसे सहूँ।



आशियाना नहीं,

बेठिकाना फिरूँ।



यार भी छल गये,

अब किसे… Continue

अहवाल-ए-ज़वाल

Posted on November 17, 2012 at 2:16pm 3 Comments

पुर-शुआ पुर-शुआ था हमारा शहर रोशनी में नहाया हुआ था समाँ,

आज लेकिन न जाने क्या हो गया, हो गया है अँधेरा अँधेरा जवाँ।



हैं तवारीख में दास्तानें सभी वक्त की मार से खाक में मिल गये,

जो जवाहर सजाते रहे ताज में और ताबे रहा जिनके' सारा जहाँ।



उल्फतों से यही हाय कहता रहा मैं तुम्हारा बना हूँ सदा के लिये,

पर अचानक उसी ने गज़ब ये किया चल दिया ठोकरें दे न जाने कहाँ।



बन्द कर के निगाहें भरोसा किया जानो दिल भी जिन्हें दे दिये थे कभी,

ज़ख़्म उनसे हमें तल्ख ऐसे… Continue

धड़कनें जलती बुझती रही रात भर...

Posted on November 15, 2012 at 11:26am 8 Comments

दिल की लौ थरथराती रही रात भर,

धड़कनें जलती बुझती रही रात भर।



गिर के खुद ही सम्भलती रही रात भर,

ज़िन्दगी लड़खड़ाती रही रात भर।



मैंने रब से भी कितनी ही फरियाद की,

एक तसल्ली ही मिलती रही रात भर।



बुझ न जब तक गई इन चराग़ों की लौ,

तेज़ आँधी ही चलती रही रात भर।



शाम घिरने से लेके सहर खिलने तक,

दर हवायें बजाती रही रात भर।



उसका वादा था वो पर नहीं आ सका,

ये खलिश दिल जलाती रही रात भर।



जब हवा रात भर ठंडी ठंडी… Continue

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At 8:30pm on September 1, 2011, khalid ansari said…
bahut bahut shukriya bhai...
At 10:46pm on June 15, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 3:40pm on June 15, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 7:20pm on June 10, 2011, Admin said…
 
 
 

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