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Deepanjali Dubey
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Nilesh Shevgaonkar commented on Deepanjali Dubey's blog post ग़ज़ल: लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी
"त थ द ध..... न के हिसाब से मानक शब्द हिन्दी है न कि हिंदी .. हिन्दी के गुणगान करती रचना में हिन्दी ही ठीक न लिखा तो क्या लिखा झूठी तारीफ़ें हम नहीं करते क्षमा करें "
Jan 23
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Deepanjali Dubey's blog post ग़ज़ल: लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी
"बहुतख़ूब बहुतख़ूब ग़ज़ल कही आदरणीया...बधाई"
Jan 17
Deepanjali Dubey posted a blog post

ग़ज़ल: लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी

1222 1222 1222 1222लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी अगर है हिंद की संतान फिर बोले यहाँ हिंदीबताता छंद चौपाई है पिंगल शास्त्र अपना क्या हमारे देश की यह मात्र भाषा है रवाँ हिंदीसिखाया पाठशाला में है इसकी संस्कृत जननी वतन का नाम हिंदोस्तान हमारा कारवाँ हिंदीयही है ध्येय चारो ओर इसका ध्वज भी लहराये हमारे देश के हर प्रांत में गूंजे सदाँ हिंदीन शर्मायें विदेशों में कभी हिंदी अगर बोलें हमें हो गर्व हिंदी पर हमारी तो जुबाँ हिंदीहैं पटरानी सभी भाषा में अव्वल इसका दर्जा हैसजी है रस अलंकारों…See More
Jan 12
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय ऋचा यादव जी सादर प्रणाम बहुत ख़ूब आदरणीया बधाई स्वीकार करें।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय कमरुद्दीन अमीर जी सादर अभिवादन। आदरणीय सर जी की इस्लाह बेहतरीन है।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अंजुमन मंसूरी जी सादर प्रणाम। बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है। आदरणीय सर जी की इस्लाह पर गौर कीजिए सादर।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय रवी शुक्ला जी सादर प्रणाम। बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय बधाई स्वीकार करें"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी सादर प्रणाम। बेहतरीन ग़ज़ल हुई है आदरणीय बधाई स्वीकार करें सादर।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी सादर प्रणाम आदरणीय। आदरणीय सर जी की इस्लाह पर गौर कीजिए सादर।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दंडपानी नाहक जी सादर प्रणाम। बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय सलिक गणवीर जी सादर प्रणाम आदरणीय। बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें सादर।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय ऋचा यादव जी सादर प्रणाम। ग़ज़ल तक आने के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीया।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय संजय शुक्ला जी सादर प्रणाम आदरणीय। बेहतरीन ग़ज़ल हुई है आदरणीय बधाई स्वीकार करें।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दयाराम जी सादर प्रणाम स्वीकार करें। ग़ज़ल तक आने के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीय।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय शिज्जू शकूर जी सादर प्रणाम आदरणीय। ग़ज़ल तक आने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं कि आदरणीय।"
Dec 29, 2021
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीया अंजुमन मंसूरी दी सादर प्रणाम आदरणीया ग़ज़ल तक आने व हौसला अफजाई के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं।"
Dec 29, 2021

Profile Information

Gender
Female
City State
Kanpur, Uttar Pradesh
Native Place
Kanpur City
Profession
Housewife
About me
I like to write and I am trying to be an inspiring poet!

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ग़ज़ल: लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी

1222 1222 1222 1222

लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी

अगर है हिंद की संतान फिर बोले यहाँ हिंदी

बताता छंद चौपाई है पिंगल शास्त्र अपना क्या

हमारे देश की यह मात्र भाषा है रवाँ हिंदी

सिखाया पाठशाला में है इसकी संस्कृत जननी

वतन का नाम हिंदोस्तान हमारा कारवाँ हिंदी

यही है ध्येय चारो ओर इसका ध्वज भी लहराये

हमारे देश के हर प्रांत में गूंजे सदाँ हिंदी

न शर्मायें विदेशों में कभी हिंदी अगर…

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Posted on January 10, 2022 at 4:30am — 2 Comments

"दीप" की ग़ज़ल

122 122 122 122

किसी और की अब जरूरत नहीं है

मगर तुम न कहना मुहब्बत नहीं है

हुई जब से शादी तो फुर्सत नहीं है

रहूंँ मायके में इज़ाज़त नहीं है

मैं मदहोश उनकी ही यादों में रहता

मुझे भूलने की तो आदत नहीं है

सरे आम होते यहां ज़ुर्म रहते

उसे रोकने की भी हिम्मत नहीं है

तुम्हें गर न देखें थमी सांस रहती

अगर मर गया भी तो हैरत नहीं है

फ़कत इश्क़ में अब दिखावा ही दिखता

नये शोहदों में…

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Posted on November 1, 2021 at 3:00pm — 3 Comments

 
 
 

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