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ग़ज़ल: लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी

1222 1222 1222 1222

लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी
अगर है हिंद की संतान फिर बोले यहाँ हिंदी

बताता छंद चौपाई है पिंगल शास्त्र अपना क्या
हमारे देश की यह मात्र भाषा है रवाँ हिंदी

सिखाया पाठशाला में है इसकी संस्कृत जननी
वतन का नाम हिंदोस्तान हमारा कारवाँ हिंदी

यही है ध्येय चारो ओर इसका ध्वज भी लहराये
हमारे देश के हर प्रांत में गूंजे सदाँ हिंदी

न शर्मायें विदेशों में कभी हिंदी अगर बोलें
हमें हो गर्व हिंदी पर हमारी तो जुबाँ हिंदी

हैं पटरानी सभी भाषा में अव्वल इसका दर्जा है

सजी है रस अलंकारों से प्यारी गुलिस्तांँ हिंदी

अभी शुरुआत है प्यारों लड़ाई और लड़नी है

न कोई प्रश्न हो इस पर जहाँ जाएं वहांँ हिंदी

मिला वरदान ऋषि मुनियों से चिर यौवन जिएगी तू

हमारे मुल्क का अभिमान है यह नौजवाँ हिंदी

ख़ुशी से झूमती है "दीप" लिखती जब कोई कविता

कृपा है शारदे तेरी हुई जो मेहरबाँ हिंदी

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on Sunday

त थ द ध..... न के हिसाब से मानक शब्द हिन्दी है न कि हिंदी .. हिन्दी के गुणगान करती रचना में हिन्दी ही ठीक न लिखा तो क्या लिखा 
झूठी तारीफ़ें हम नहीं करते 
क्षमा करें 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 17, 2022 at 11:04pm

बहुतख़ूब बहुतख़ूब ग़ज़ल कही आदरणीया...बधाई

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