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विवेक ठाकुर "मन"
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विवेक ठाकुर "मन"'s Page

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मनोज अहसास commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
"बेशकीमती जानकारी के लिए हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब"
Jan 22, 2020
Samar kabeer commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
" //मत ले मैं आपने मंजर और खंजर इस्तेमाल कर लिया है इसलिए यह ग़ज़ल जर अंत वाले काफिये की कैद में आ गई है जिसका पूरी ग़ज़ल में निर्वाह करना पड़ेगा अर्थात ऐसे ही कवाफी लेने पड़ेगे जिनके अंत मे जर हो// मनोज जी,ऐसा नहीं है, क़वाफ़ी अर के हैं,मतले में…"
Jan 21, 2020
Samar kabeer commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
"जनाब विवेक ठाकुर 'मन' जी आदाब,पहली बार ओबीओ पर आपकी रचना पढ़ रहा हूँ,आपका स्वागत है । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है लेकिन बह्र,शिल्प,व्याकरण की दृष्टि से अभी ये बहुत समय चाहती है, ओबीओ पर मौजूद 'ग़ज़ल की कक्षा' का लाभ लें,अध्यन…"
Jan 21, 2020
मनोज अहसास commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
"प्रिय मित्र इस ग़ज़ल की बहर क्या है यह स्पष्ट करें ग़ज़ल की बहर गजल के ऊपर लिख दिया करें इससे गजल को समझने में आसानी रहती है मत ले मैं आपने मंजर और खंजर इस्तेमाल कर लिया है इसलिए यह ग़ज़ल जर अंत वाले काफिये की कैद में आ गई है जिसका पूरी ग़ज़ल में…"
Jan 21, 2020
विवेक ठाकुर "मन" commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय"
Jan 18, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
"आ. भाई विवेक जी, अच्छी गजल हुई है, हार्दिक बधाई ।"
Jan 17, 2020
विवेक ठाकुर "मन" posted a blog post

एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ

रब ना करे मैं ऐसा मंज़र देखूँदोस्त के हाथ में खंज़र देखूँसबकी ख़ुशी सलामत रख मौलाना ही टूटता किसी का घर देखूँगम दे तो हिम्मत भी बक्श ख़ुदाआँखों में किसी की ना डर देखूँख़्वाब पूरे होते नहीं देखने भर सेखुद को भी तो आज़माकर देखूँये हवा भी हारेगी मिरे यकीं सेउम्मीद-ए-चिराग़ जला कर देखूँठान ही ली जब चलने की 'विवेक'फिर क्यूँ मुश्किल-ए-सफ़र देखूँ#मौलिक व अप्रकाशित#See More
Jan 15, 2020
विवेक ठाकुर "मन" is now a member of Open Books Online
Jan 14, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
शिमला हिमाचल प्रदेश
Native Place
शिमला
Profession
Self employed
About me
Love to read and write ghazals

विवेक ठाकुर "मन"'s Blog

एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ

रब ना करे मैं ऐसा मंज़र देखूँ
दोस्त के हाथ में खंज़र देखूँ

सबकी ख़ुशी सलामत रख मौला
ना ही टूटता किसी का घर देखूँ

गम दे तो हिम्मत भी बक्श ख़ुदा
आँखों में किसी की ना डर देखूँ

ख़्वाब पूरे होते नहीं देखने भर से
खुद को भी तो आज़माकर देखूँ

ये हवा भी हारेगी मिरे यकीं से
उम्मीद-ए-चिराग़ जला कर देखूँ

ठान ही ली जब चलने की 'विवेक'
फिर क्यूँ मुश्किल-ए-सफ़र देखूँ
#मौलिक व अप्रकाशित#

Posted on January 15, 2020 at 5:19pm — 6 Comments

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