For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Jagran forum contest - Challenges before Indian Democracy

मित्रों ,
मुझे मेरे लेख पर जागरण मंच द्वारा इस फोरम में भाग लेने हेतु आमंत्रित भी किया गया था , पर इस समय कोस्टा रीका ( मध्य अमेरिका ) में होने के कारण , जहां से लगभग छत्तीस घंटे लगते हैं दिल्ली की हवाई यात्रा में , मैं इतने अल्प समय में आने की योजना ही नहीं बना पाया। मैं उपस्थित होता तो प्रसन्नता और होती।
विजय शंकर

Views: 295

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 10, 2015 at 11:58pm
आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी , आपकी बधाइयों के लिए आभार एवं ह्रदय से धन्यवाद। मैं समझता हूँ जागरण मंच ने इस तरह की चर्चा करा कर एक बहुत ही सराहनीय कार्य किया है क्यों कि हम इस प्रकार के विषयों पर अपने प्रिय नेताओं के वक्तव्य ही सुन पाते हैं और प्रायः एक पक्ष को ही जान पाते हैं।
......... मेरा यह भी मानना है अन्य मंचों को भी इस दिशा में आगे आना चाहिए। हमने जनतंत्र अपनाया , हम अढ़सठ वषों से जनतंत्र हैं और हम में से कितने लोग जनतंत्र का अर्थ समझते हैं ? विचारणीय है।
आपको पुनः धन्यवाद, सादर।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 10, 2015 at 11:21pm

आदरणीय विजय शंकरजी, हार्दिक बधाइयाँ व अशेष शुभकामनाएँ ..

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 10, 2015 at 10:24pm
बधाई तो जागरण मंच के लिए बनती है जिन्होंने जनतंत्र पर खुली चर्चा की वरना हमने तो जनतंत्र की भी अपनी अपनी परिभाषाएं गढ़ रखी हैं ,
आपकी सादर भावनाओं के लिए धन्यवाद , आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी , सादर।
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on December 10, 2015 at 9:59pm
बहुत बहुत बधाई!
Comment by Dr. Vijai Shanker on December 10, 2015 at 8:20pm
बधाई तो जागरण मंच के लिए बनती है जिन्होंने जनतंत्र पर खुली चर्चा की वरना हमने तो जनतंत्र की भी अपनी अपनी परिभाषाएं गढ़ रखी हैं ,
आपकी सादर भावनाओं के लिए धन्यवाद , प्रिय मिथिलेश वामनकर जी , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on December 10, 2015 at 8:18pm
बधाई तो जागरण मंच के लिए बनती है जिन्होंने जनतंत्र पर खुली चर्चा की वरना हमने तो जनतंत्र की भी अपनी अपनी परिभाषाएं गढ़ रखी हैं ,
आपकी सादर भावनाओं के लिए धन्यवाद , आदरणीय सतविंदर कुमार जी , सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 10, 2015 at 5:17pm

हार्दिक बधाई आपको सर 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 10, 2015 at 3:50pm
हार्दिक बधाई जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service